देबीगंज एफसीआई गोदाम में 6/7स्टॉक डंप चावल बारिश में भीगा, जिम्मेदारी वेयरहाउस प्रबंधन या राइस मिलरों की

ब्रेकिंग न्यूज़ | बलरामपुर
देबीगंज एफसीआई गोदाम में 6/7स्टॉक डंप चावल बारिश में भीगा, जिम्मेदारी वेयरहाउस प्रबंधन या राइस मिलरों की
बलरामपुर जिले के ग्राम देबीगंज स्थित एफसीआई गोदाम में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। अचानक हुई तेज बारिश के कारण खुले परिसर में रखा करीब 6 ट्रक चावल भीग गया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक नुकसान लाखों रुपये का बताया जा रहा है।
यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए रखा गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह भीगा हुआ चावल गरीब हितग्राहियों में वितरित किया जाएगा या इसे अनुपयोगी घोषित किया जाएगा।

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?
सूत्रों के अनुसार राइस मिलों से कुटाई के बाद चावल वेयरहाउस परिसर में लाकर तोल पश्चात डंप किया गया था। लेकिन उसे समय पर गोदाम के अंदर सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। इसी बीच अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई।
बारिश के कारण खुले में रखे चावल के बोरे भीग गए। मौके पर तत्काल ढंकने या सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की समुचित व्यवस्था नजर नहीं आई।
वेयरहाउस प्रभारी ने क्या कहा?
चावल कैसे भीग गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी?
वेयरहाउस प्रभारी देव साय (नान) के अधिकारी ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा:
परिसर में पड़े चावल की जिम्मेदारी वेयरहाउस प्रबंधन की नहीं है।राइस मिलों की जिम्मेदारी है मिल संचालकों ने स्टॉक को प्रांगण में छोड़ दिया था।

राइस मिलर ने चावल को बाहर डंप क्यों किया ?
यह प्रक्रिया उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार चल रही थी।
हालांकि, संबंधित अधिकारी कैमरे के सामने आने से बचते रहे और ऑन रिकॉर्ड बयान देने से इनकार कर दिया।
राइस मिलर संघ का पलटवार
राइस मिलर संघ के अध्यक्ष रूपेश मित्तल ने इस मामले में वेयरहाउस प्रबंधन के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है:
जिस स्थान पर चावल डंप हुआ है, वह वेयरहाउस परिसर के अंदर है।
डंपिंग से पहले चावल का कांटा तौल (वजन) किया जाता है।
तौल के बाद ही मिलर की जिम्मेदारी पूरी मानी जाती है।
नैतिकता के आधार पर भी चावल की सुरक्षा की जिम्मेदारी वेयरहाउस प्रबंधन की बनती है।
उन्होंने कहा कि जब स्टॉक वेयरहाउस के कंपाउंड में प्रवेश कर चुका था और तौल प्रक्रिया पूरी हो गई थी, तो उसकी देखरेख और सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन की होनी चाहिए थी।
पीडीएस और जिले की स्थिति
जिले में पहले से ही राशन वितरण प्रभावित रहा है। जनवरी माह में केवल लगभग 60/70 प्रतिशत लगभग हितग्राहियों को ही चावल मिल पाया था। फरवरी में भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
ऐसे समय में 6/7स्टॉक डंप चावल का भीग जाना गंभीर चूक मानी जा रही है। यदि चावल उपयोग योग्य नहीं रहा तो गरीब हितग्राहियों को मिलने वाले राशन पर सीधा असर पड़ सकता है।
बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं
यदि तौल प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो चावल को गोदाम के अंदर क्यों नहीं रखा गया?
बारिश की आशंका के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
क्या गुणवत्ता जांच कर यह तय किया जाएगा कि चावल वितरण योग्य है या नहीं?
जिला प्रशासन या राज्य सरकार इस पर क्या कार्रवाई करेगी?
जांच और कार्रवाई की मांग
खबर चलाए जाने के बाद जिला प्रशासन इस स्पेशल ज्ञान लेता है या नहीं लेकिन आने वाला समय बताएं जिस तरीके से चावल भीगा है यह अपने आप में छत्तीसगढ़ में चावल देखी गई है
जब प्रदेश में चावल वितरण को लेकर पहले से ही सवाल खड़े हैं, तब लाखों रुपये के स्टॉक का इस तरह बारिश में भीग जाना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।




