नौ करोड़ का एनीकट बना मौत का कुंड: रामानुजगंज में फिर बहा एक युवक!

रामानुजगंज का एनीकट बना मौत का जाल: मछली पकड़ते हुए बहा युवक, छह जानें निगल चुका अधूरा प्रोजेक्ट — विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी
रामानुजगंज। कभी जलसंवर्धन के नाम पर बनाया गया रामानुजगंज का एनीकट अब मौत का गड्ढा बन चुका है। नगर के वार्ड क्रमांक 14 निवासी 25 वर्षीय काशी भुइंया आज दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मछली पकड़ते वक्त एनीकट के तेज बहाव में बह गया। शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका।
काशी अपने पिता बैजनाथ भुइंया के साथ रोज की तरह मछली पकड़ने गया था। उसने मच्छरदानी से मछली पकड़ने का जुगाड़ बनाया और एनीकट के पहले गेट पर बैठा था। अचानक पैर फिसल गया और वह बेकाबू होकर पानी में जा गिरा। उसने खुद को बचाने की कोशिश की, पर बहाव इतना तेज था कि कुछ ही पलों में वह पानी की लहरों में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि युवक पानी में संघर्ष करता दिखाई दिया, फिर अचानक गायब हो गया।

सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे। गोताखोरों को बुलाया गया, तलाशी अभियान शुरू हुआ, लेकिन घंटों बाद भी युवक का कोई अता-पता नहीं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि इलाके में गुस्से और गम का माहौल है।
नौ करोड़ का एनीकट, अधूरा काम और मौतों का सिलसिला
रामानुजगंज का यह एनीकट सरकारी भ्रष्टाचार और इंजीनियरिंग लापरवाही का जिंदा उदाहरण बन चुका है। करीब नौ करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया यह प्रोजेक्ट आज तक अधूरा है। डाउनस्ट्रीम फ्लोर (फर्श) का निर्माण ही नहीं हुआ, जिससे पानी नीचे गिरते वक्त भंवर बनाता है — और जो भी उसमें गिरता है, उसका बचना लगभग असंभव है।
पत्थरों और खुले सरियों ने इसे मौत का जाल बना दिया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस एनीकट में अब तक छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हर बार जांच और कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलें खटखटाई जाती हैं, लेकिन ज़मीन पर कोई बदलाव नहीं होता।
“व्यक्तिगत लाभ” के लिए बना गलत जगह एनीकट
ग्रामीणों का आरोप है कि यह एनीकट मूल योजना के अनुसार दूसरे स्थान पर बनना था। लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों की “सुविधा” के लिए इसे रामानुजगंज में बना दिया गया — और अब यह पूरे नगर के लिए अभिशाप बन गया है। तकनीकी खामियों को अनदेखा कर जो निर्माण कराया गया, उसने वर्षों से जानें ली हैं, और प्रशासन अब भी तमाशबीन बना हुआ है।
, जवाबदेही गायब
एनीकट पर कोई चेतावनी बोर्ड नहीं, कोई सुरक्षा रेलिंग नहीं, न कोई चौकीदार। लोग रोज यहां मछली पकड़ने या नहाने आते हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाया। हादसे के बाद मौके पर अधिकारी जरूर पहुंचते हैं, लेकिन कुछ घंटों बाद सब फिर से सामान्य हो जाता है — जैसे कुछ हुआ ही न हो।
जनता का सवाल: कितनी लाशों के बाद जागेगा विभाग?
यह हादसा सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का आईना है।
रामानुजगंज के लोग पूछ रहे हैं — जब छह लोगों की मौत के बाद भी विभाग नहीं चेता, तो क्या किसी बड़े अफसर या नेता की जान जानी बाकी है, तब जाकर कार्रवाई होगी?
एनीकट बनने के सालों बाद भी उसका “पूरा होना” एक सरकारी झूठ से ज्यादा कुछ नहीं। जिस परियोजना को जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था, वह आज स्थानीयों के लिए जानलेवा जाल बन चुकी है।
रामानुजगंज का एनीकट इस वक्त सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि एक लापरवाह सिस्टम की कब्रगाह बन गया है — जहां हर नई लहर के साथ किसी का भविष्य बह जाता है।



