बलरामपुर जिले में किसानों की लंबी लाइनें, पंजीयन और Kadi Farwad की दिक्कतों से बढ़ी चिंता

बलरामपुर जिले में किसानों की लंबी लाइनें, पंजीयन और Kadi Farwad की दिक्कतों से बढ़ी चिंता
बलरामपुर जिले की रामानुजगंज, वाड्रफनगर, शंकरगढ़, राजपुर और अन्य तहसीलों में पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं। वजह एक ही है। Kadi Farwad की अधूरी प्रक्रिया, नए पंजीयन में तकनीकी त्रुटियां और कृषि विभाग की धीमी कार्यप्रणाली। आज का दिन पंजीयन का अंतिम अवसर है, इसलिए सुबह से ही तहसीलों में किसानों की भीड़ और बढ़ गई है।
किसानों के अनुसार वे कई दिनों से तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पोर्टल की त्रुटियां और फील्ड स्तर की औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण किसी का पंजीयन दिखाई नहीं दे रहा, तो किसी का Kadi Farwad रुका हुआ है। इससे उन किसानों में सबसे ज्यादा तनाव है जो धान बेचने के लिए हर साल सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद किसानों को उम्मीद थी कि समय रहते पंजीयन और Kadi Farwad का काम पूरा हो जाएगा। लेकिन जिलों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि पोर्टल पर डेटा मेल नहीं खा रहा, राजस्व अभिलेख अपडेट नहीं हैं, और कई किसानों के नाम फसल सर्वे में दर्ज ही नहीं हैं। इससे हजारों किसानों का पंजीयन अटक गया है और कई के रिकॉर्ड पूरी तरह गायब दिख रहे हैं।
गिद्वारी और रकबा कम और क्षेत्र में हाल ही बारिश से फसल नष्ट होने की घटनाओं ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। प्रभावित किसान भी पंजीयन प्रक्रिया में तेजी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नुकसान के बाद धान बेचकर ही वे आगे की खेती के लिए पूंजी जुटा पाते हैं। ग्रामीण इलाकों से आई महिलाएं भी नाराजगी जता रही हैं कि रोज आने जाने में समय और पैसा दोनों लग रहा है, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।
किसानों का कहना है कि वे सुबह से शाम तक कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन या तो बिजली की समस्या आ जाती है, या पोर्टल लॉगिन नहीं हो पाता, या अधिकारी फील्ड वेरिफिकेशन में व्यस्त हो जाते हैं। इससे उनकी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कई किसान यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब पंजीयन की अंतिम तारीख पहले से तय थी, तो तैयारी पहले क्यों नहीं हुई।
इसी बीच रामानुजगंज तहसीलदार मनोज पैकरा ने बताया कि प्रशासन पूरी कोशिश में है। उनके अनुसार शाम तक अधिकतर Kadi Farwad और नए पंजीयन से जुड़ी समस्याओं को हल कर लिया जाएगा। त्रुटि सुधार की प्रक्रिया अंतिम तारीख के बाद भी जारी रहेगी, ताकि जिन किसानों के रिकॉर्ड में गलती है, उन्हें मौका मिल सके। हालांकि, वे भी स्वीकार करते हैं कि बड़ी संख्या में किसानों के आने से काम का दबाव बहुत बढ़ गया है।
अब सवाल यह है कि अंतिम दिन तक जिला प्रशासन कितना काम पूरा करा पाएगा। हजारों किसानों का भविष्य इसी पर टिका है कि उनके दस्तावेज समय पर ठीक हों और पंजीयन पूरा हो। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कई किसान इस सीजन की धान खरीदी प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा।
किसान उम्मीद में हैं कि प्रशासन आखिरी समय में उन्हें राहत देगा। अब नजरें इस बात पर हैं कि आने वाले कुछ घंटों में जिला प्रशासन कितनी तेजी से और कितनी कुशलता से इन जटिल समस्याओं का समाधान कर पाता है।



