एक विभाग, दो नियम: प्राचार्य के धरने पर जिला प्रशासन की सख्ती, फ्लेक्सी-पोस्टर हटाए

एक विभाग, दो नियम: प्राचार्य के धरने पर जिला प्रशासन की सख्ती, फ्लेक्सी-पोस्टर हटाए
शिक्षा विभाग की कथित दोहरी नीति के खिलाफ प्राचार्य का अनशन, आठ वर्षीय पुत्र के साथ DEO कार्यालय में डटे, प्रशासन पर गंभीर आरोप
जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और दोहरी नीति के आरोप लगाते हुए प्राचार्य राजेंद्र देवांगन ने 04 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे के बाद अन्न-जल त्याग कर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में अनशन शुरू कर दिया। खास बात यह है कि अनशन के दौरान उनके साथ उनका आठ वर्षीय पुत्र भी मौजूद है।

प्राचार्य राजेंद्र देवांगन का आरोप है कि उन्हें निलंबन के बाद पुनः सेवा में लिए जाने के बावजूद प्राचार्य का कार्यभार नहीं सौंपा गया। जब उन्होंने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखी, तो DEO ने विभागीय जांच का हवाला देते हुए कार्यभार देने से इनकार कर दिया। इसी मुद्दे को लेकर DEO और प्राचार्य के बीच तीखी बहस भी हुई।
प्राचार्य का कहना है कि यदि विभागीय जांच किसी पद के लिए अयोग्यता का आधार है, तो यह नियम सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी भी पूर्व में निलंबित रह चुके हैं और उन पर भी विभागीय जांच चल चुकी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब एक प्राचार्य जांच के कारण पद पर नहीं रह सकता, तो वही नियम उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर क्यों लागू नहीं होते।

न्याय की मांग को लेकर प्राचार्य इससे पहले कलेक्टर कार्यालय के पास गांधी प्रतिमा के समीप अपने आठ वर्षीय बच्चे के साथ धरने पर बैठ गए थे। धरने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा और उन्हें जबरन धरना स्थल से हटा दिया गया। इस दौरान उनके द्वारा लगाए गए पोस्टर और बैनर भी पुलिस ने समेट लिए। इस कार्रवाई के बाद प्राचार्य ने प्रशासन पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबाने का आरोप लगाया।
अब प्राचार्य ने अपना आंदोलन और तेज करते हुए DEO कार्यालय में ही अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने लिखित रूप में बयान जारी कर कहा है कि वह 04 फरवरी 2026 को 12 बजे के बाद से अन्न-जल त्याग कर DEO कार्यालय में भूखे-प्यासे बैठे हैं और वहीं सो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कथित अनुशासनहीनता करने वाले व्यक्ति को संरक्षण दिया जा रहा है।

प्राचार्य राजेंद्र देवांगन ने यह भी चेतावनी दी है कि अनशन के दौरान यदि उनके या उनके आठ वर्षीय पुत्र के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री मनी राम की होगी। इस बयान के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।

प्राचार्य का कहना है कि नियम-कानून किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं होते, बल्कि सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। यदि शिक्षा विभाग में पद और प्रभाव के आधार पर अलग-अलग नियम बनाए जाएंगे, तो इससे व्यवस्था पर लोगों का भरोसा खत्म हो जाएगा। उन्होंने मांग की है कि या तो उन्हें नियमों के अनुसार प्राचार्य का कार्यभार दिया जाए या फिर सभी अधिकारियों पर एक समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल प्राचार्य का अनशन जारी है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पूरे घटनाक्रम पर शिक्षक संगठनों और आमजन की नजर बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को गंभीरता से लेकर क्या ठोस कदम उठाता है या मामला और तूल पकड़ता है।





