न्यायालय परिसर में मानवता की मिसाल: गरीब पक्षकारों के लिए न्यूनतम दर पर भोजन की पहल

न्यायालय परिसर में मानवता की मिसाल: गरीब पक्षकारों के लिए न्यूनतम दर पर भोजन की पहल
बलरामपुर-रामानुजगंज जिला न्यायालय में स्टाफ के सहयोग से चल रही सेवा, दूर-दराज से आने वाले लोगों को मिल रही बड़ी राहत
रामानुजगंज। न्याय की तलाश में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से जिला न्यायालय पहुंचने वाले पक्षकारों के लिए बलरामपुर-रामानुजगंज न्यायालय परिसर में एक सराहनीय पहल की जा रही है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में जिला न्यायालय के स्टाफ के सहयोग से न्यूनतम दर पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर पक्षकारों को बड़ी राहत मिल रही है।

अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग सुबह से शाम तक न्यायालयीन कार्यों के लिए परिसर में मौजूद रहते हैं। ऐसे में भोजन की व्यवस्था करना उनके लिए एक बड़ी समस्या बन जाती थी। इस पहल के बाद उन्हें न तो भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और न ही महंगे भोजन का खर्च उठाने की चिंता रहती है।
न्यायालय परिसर में आने वाले कई पक्षकार ऐसे होते हैं, जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर होते हैं। उनके लिए यह सेवा किसी सहारे से कम नहीं है। न्यूनतम दर पर मिलने वाला भोजन उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
“न्यायालय आने वाला हर व्यक्ति सम्मान और सुविधा का हकदार है। आर्थिक परेशानी के कारण किसी को भोजन के लिए परेशान न होना पड़े, यही इस पहल का उद्देश्य है।”
— न्यायालय स्टाफ
इस सेवा का लाभ न्यायालय परिसर में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी भी ले रहे हैं। खेती-बाड़ी के सीजन के कारण वर्तमान में प्रतिदिन करीब 30 से 40 पक्षकार भोजन कर रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या बढ़कर लगभग 100 तक पहुंच जाती है।

सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि भोजन व्यवस्था को और बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए गैस की पर्याप्त उपलब्धता की आवश्यकता है। गैस की कमी के कारण कभी-कभी परेशानी आती है, लेकिन सभी के सहयोग से यह सेवा लगातार जारी है।
ग्रामीण और जरूरतमंद पक्षकारों के लिए न्यायालय परिसर की यह पहल न केवल सुविधा दे रही है, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।
