बलरामपुर

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में आयोजित जिला स्तरीय खेल, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का सम्पन्नविधायक एवं कलेक्टर ने विजेता टीम को शील्ड और मेडल प्रदाय कर किया पुरस्कृत

ANAND MISHRA OFFICIAL PRESENTS

 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बलरामपुर (भेलवाडीह) परिसर में जिला स्तरीय खेल, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें बलरामपुर-रामानुजगंज जिले अंतर्गत संचालित 06 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा भाग लिया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के संसदीय सचिव एवं सामरी विधायक श्री चिन्तामणी महाराज एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने विजेता टीमों को शील्ड और मेडल प्रदाय कर पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संसदीय सचिव एवं सामरी विधायक श्री चिन्तामणी महाराज ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि खेल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। आज के समय में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बच्चों को समझाइस दी कि बच्चों को अपने माता-पिता का कभी अनादर नहीं करना चाहिए।


कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने छात्र-छात्राओं के उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जो छात्र-छात्राएं प्रतियोगिता में सफल हुए हैं, उनको बधाई किन्तु जो प्रतिभागी असफल हुए हैं उन्हें निराश न होकर दोगुनी क्षमता के साथ पुनः प्रयास करना चाहिए। कलेक्टर ने छात्र-छात्राओं को बताया कि मैं आपके लिए एक कलेक्टर नहीं बल्कि एक अभिभावक हूं, आप अपनी समस्या सीधे जिला कार्यालय में उपस्थित होकर मुझे बता सकते हैं। सहायक आयुक्त आयुक्त श्री आर.के.शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों को खेल से जुड़ाव स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, कोरोना काल में संस्थाएं बंद थी, किन्तु अभी वर्तमान में संस्थाएं संचालित हुई हैं। यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष कराया जाता है आगामी वर्ष में और बेहतर आयोजन का प्रयास किया जायेगा।
इस आयोजन में खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत खो-खो, कबड्डी, फूटबॉल, व्हॉलीबाल, तिरंदाजी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, 100 मीटर, 200 मीटर एवं 400 मीटर दौड़ तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोककला अंतर्गत रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बौद्धिक प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रश्नमंच, वाद-विवाद का भी आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का आयोजन समूहवार 14 वर्ष से नीचे एवं 19 वर्ष नीचे में बालक-बालिका वर्गों में किया गया, जिसमें छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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