छत्तीसगढ़जसपुरदिल्लीदेशपुलिसप्रतापपुरबलरामपुरबलौदा बाजारबस्तरबिलासपुरभरतपुर सोनहतभाजपाभारतमनेन्द्रगढ़महासमुंदमहेंद्रगढ़मुंबईराजपुरराज्यसभारामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायगढ़रायपुररायपुरवाड्रफनगरवीजापुरसम्मानसरगुजासुरजपुर

बलरामपुर में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला: 3.67 एकड़ में उगाई गई फसल प्रशासन ने नष्ट की, कई सवाल खड़े

बलरामपुर में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला: 3.67 एकड़ में उगाई गई फसल प्रशासन ने नष्ट की, कई सवाल खड़े


बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। जिले के थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत त्रिपुरा के आश्रित गांव में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन को मिली सूचना के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर लगभग 3.67 एकड़ भूमि पर उगाई गई अफीम की फसल को उखाड़कर नष्ट करने की कार्रवाई की।
मंगलवार तड़के से ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर डटे रहे और पूरे इलाके की घेराबंदी कर कार्रवाई की गई। नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर अफीम की खेती का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए।


झारखंड के व्यक्ति द्वारा कराई जा रही थी खेती
सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन के मालिकों से झारखंड के एक व्यक्ति ने लिखित समझौता कर अफीम की खेती कराई थी। बताया जा रहा है कि अफीम के डोडों से एक-दो बार रस (लेटेक्स) भी निकाला जा चुका था और फसल पूरी तरह पकने की स्थिति में थी।
यह संकेत देता है कि खेती काफी समय से चल रही थी और बड़े पैमाने पर अवैध उत्पादन की तैयारी की जा रही थी।


प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती लंबे समय से जारी थी, लेकिन यह जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की निगरानी से कैसे बची रही, यह अब जांच का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धान खरीदी शुरू होने से पहले प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों द्वारा इलाके का निरीक्षण किया गया था, इसके बावजूद इतनी बड़ी अवैध फसल का पता नहीं चल पाया। इससे प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


सरपंच ने जनवरी में ही दी थी सूचना
ग्राम पंचायत त्रिपुरा के सरपंच रामनाथ ने बताया कि उन्होंने जनवरी माह में ही पुलिस को इस संबंध में जानकारी दे दी थी। उन्होंने यह सूचना व्हाट्सएप के माध्यम से भी पुलिस को भेजी थी, लेकिन उस समय किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।
सरपंच के अनुसार यदि उसी समय कार्रवाई कर दी जाती, तो अवैध खेती को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता था।
पुलिस और प्रशासन की चुप्पी पर उठे संदेह
करीब दो महीने तक कार्रवाई नहीं होने से पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी खेती बिना किसी संरक्षण या लापरवाही के संभव नहीं है।
ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं स्थानीय स्तर पर किसी कर्मचारी या प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं रही।


एसआईटी जांच की उठी मांग


मामले की जांच के लिए गठित दल के संयोजक डॉ. प्रीतम राम ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि जिस क्षेत्र को अमन और शांति के लिए जाना जाता है, वहां अब अफीम जैसी नशीली फसलों की खेती होने लगी है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग भोले-भाले हैं और कुछ लोग उन्हें थोड़े पैसे का लालच देकर तथा भ्रम में रखकर अफीम की खेती करवाते हैं।
डॉ. प्रीतम राम ने पूरे मामले की विशेष जांच एसआईटी (SIT) से कराने की मांग की है ताकि इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान हो सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
सरकार पर भी उठे सवाल
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खान कटोरा क्षेत्र को धीरे-धीरे अफीम और नशे का अड्डा बनने दिया जा रहा है, जो बेहद गंभीर स्थिति है। उनका कहना है कि सरकार को इस पर तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए।
प्रदेश में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद समय-समय पर दुर्ग और बलरामपुर जिलों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आते रहे हैं।


ऐसे मामलों के सामने आने से यह आशंका भी बढ़ गई है कि प्रदेश के अन्य इलाकों में भी कहीं न कहीं इस तरह की प्रतिबंधित फसल उगाई जा रही हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई जारी है। अब देखना होगा कि जांच में इस अवैध खेती के पीछे किन लोगों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।

Related Articles

Back to top button