उत्तर प्रदेशकाग्रेसकुसमीकोरियाक्राइमगरियाबंदछत्तीसगढ़जसपुरजांजगीर चांपाझारखण्डदिल्लीदुर्गदेशपुलिसप्रतापपुरबलरामपुरबलौदा बाजारबस्तरबिलासपुरभरतपुर सोनहतभाजपाभारतमनेन्द्रगढ़महासमुंदमहेंद्रगढ़मुंबईरघुनाथनगरराजनीतिराजपुररामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायपुररायपुरवीजापुरशंकरगढ़शिक्षासरगुजासुरजपुर

चरणदास महंत ने आदिवासी ग्रामीण की मौत पर लिखा पत्र, National Human Rights Commission से स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग

डॉ. चरणदास महंत ने हंसपुर घटना पर एनएचआरसी से स्वतंत्र जांच की मांग की

छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र के हंसपुर गांव में एक आदिवासी ग्रामीण की कथित रूप से SDM के मार से  हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में National Human Rights Commission (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन को औपचारिक पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है।
घटना को बताया गंभीर और चिंताजनक

डॉ. महंत ने अपने पत्र में कहा है कि हंसपुर गांव में हुई यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप एक निर्दोष आदिवासी ग्रामीण की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।


उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील स्थिति में है। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई यदि कठोर या असंतुलित रही हो, तो इससे न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे समुदाय का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।
स्थानीय स्तर पर आक्रोश और चिंता


डॉ. महंत ने बताया कि इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और असंतोष है। नागरिक समाज संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


आयोग से की गई प्रमुख मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने एनएचआरसी से निम्नलिखित कदम उठाने का अनुरोध किया है:
पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों का विस्तार से परीक्षण किया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।
मृतक के परिजनों को तत्काल और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
घटना में यदि अन्य ग्रामीण घायल हुए हों तो उनके समुचित उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर जोर
डॉ. महंत ने अपने पत्र में यह भी कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और नागरिकों की गरिमा की सुरक्षा लोकतांत्रिक शासन की मूल जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोग से इस मामले को जनहित और मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े गंभीर विषय के रूप में प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
उन्होंने भरोसा जताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच कर सच्चाई सामने लाएगा तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंत में डॉ. महंत ने कहा कि कानून के शासन में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को समय पर राहत व न्याय मिले।

Related Articles

Back to top button