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शकुंतला पोर्ते प्रकरण में समिति सख्त, अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति खारिज,17 मार्च को अगली बहस

शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र मामले में फिर टली सुनवाई, अब 17 मार्च को होगी अगली बहस


बलरामपुर। प्रतापपुर से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र प्रकरण में गुरुवार को जिला स्तरीय छानबीन एवं सत्यापन समिति के समक्ष सुनवाई हुई। करीब दो से तीन घंटे तक चली बहस के बाद समिति ने अगली तारीख 17 मार्च तय कर दी है।सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं और अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत कर अपने-अपने पक्ष रखे।


प्रमाणपत्र के आधार संबंधी दस्तावेज पेश करने के निर्देश
सर्व आदिवासी समाज की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि समिति ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विधायक का जाति प्रमाणपत्र किन आधारों पर जारी किया गया, उससे जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य अगली तारीख से पहले प्रस्तुत किए जाएं।
समिति ने यह भी पूछा है कि प्रमाणपत्र तैयार करते समय किन अभिलेखों और प्रमाणों को आधार बनाया गया था। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।


अधिवक्ता ने यह भी कहा कि पहले अनावेदक पक्ष ने समिति के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई थी, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जाति प्रमाणपत्र की छानबीन और सत्यापन का अधिकार जिला स्तरीय समिति को ही है।


विधायक पक्ष का दावा – तीन पीढ़ियों का रिकॉर्ड उपलब्ध
विधायक पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि शकुंतला सिंह पोर्ते के पास जाति प्रमाणपत्र से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित हैं। उनका परिवार तीन पीढ़ियों से छत्तीसगढ़ में निवास कर रहा है।


उन्होंने बताया कि विधायक के दादा अविभाजित मध्यप्रदेश में शासकीय सेवा में थे, पिता का जन्म और शिक्षा भी यहीं हुई। स्वयं विधायक का जन्म और शिक्षा अंबिकापुर में हुई है। अधिवक्ता ने दावा किया कि वे जन्म से ही गोंड जनजाति से संबंधित हैं और किसी प्रकार के परिवर्तन या रूपांतरण का सवाल ही नहीं उठता।


उन्होंने भरोसा जताया कि समिति द्वारा मांगे गए दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत कर दिए जाएंगे।
भानु प्रताप सिंह बोले – समिति को है पूर्ण अधिकार
अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि आवेदक जयश्री कुशाम और धन सिंह धुर्वे की ओर से दिए गए आवेदन पर अनावेदक पक्ष ने समिति के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जाति प्रमाणपत्र की जांच और सत्यापन का पूरा अधिकार जिला स्तरीय छानबीन समिति को है।
उन्होंने कहा कि अब संबंधित पक्ष को निर्देशित किया गया है कि प्रमाणपत्र जारी होने के आधार से जुड़े सभी दस्तावेज अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत किए जाएं।


17 मार्च पर टिकी निगाहें
लगातार टलती सुनवाई के कारण यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजरें अगली तारीख पर टिकी हैं।

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