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सीएमओ के रवैये के विरोध में 15 पार्षदों का सामूहिक बहिष्कार, नहीं हो सकी परिषद की बैठक

सीएमओ के रवैये के विरोध में 15 पार्षदों का सामूहिक बहिष्कार, नहीं हो सकी परिषद की बैठक


बलरामपुर।नगर पालिका परिषद बलरामपुर की शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक तीखे विरोध और आरोप-प्रत्यारोप के बीच नहीं हो सकी। परिषद के सभी 15 पार्षदों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रणव राय के कथित मनमाने रवैये के विरोध में बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया। पार्षदों की अनुपस्थिति के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका और बैठक स्थगित करनी पड़ी। इस घटनाक्रम से नगर की राजनीति में अचानक हलचल बढ़ गई है।
बैठक बुलाने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

विवाद की जड़ बैठक बुलाने की प्रक्रिया को लेकर है। नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी ने आरोप लगाया कि सीएमओ ने नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उनका कहना है कि परिषद की बैठक से पहले स्थायी समिति यानी पीआईसी की बैठक होना आवश्यक है, जिसमें एजेंडा तय किया जाता है और प्रस्तावों पर प्रारंभिक चर्चा होती है।
पार्षदों का आरोप है कि इस बार पीआईसी की बैठक नहीं बुलाई गई। साथ ही, परिषद की बैठक की सूचना भी नियमानुसार सात से तीन दिन पहले देने के बजाय केवल 24 घंटे पूर्व दी गई। पार्षदों का कहना है कि इतनी कम अवधि में महत्वपूर्ण मुद्दों पर तैयारी करना संभव नहीं होता।
किन मुद्दों पर होनी थी चर्चा

प्रस्तावित परिषद बैठक में नगर हित से जुड़े करीब दस अहम विषयों पर चर्चा प्रस्तावित थी। इनमें जाति प्रमाण पत्र के लंबित आवेदनों का निराकरण, नगर पालिका कार्यालय के रंग-रोगन का प्रस्ताव, वार्ड क्रमांक 6 में सड़क चौड़ीकरण, भूतपूर्व पार्षदों के मानदेय का भुगतान सहित अन्य विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।
पार्षदों का कहना है कि बिना पीआईसी बैठक के एजेंडा तय करना पारदर्शिता के विपरीत है और इससे निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
पार्षदों का आरोप: तानाशाही रवैया

पार्षदों ने आरोप लगाया कि सीएमओ प्रणव राय का रवैया लंबे समय से सहयोगात्मक नहीं रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक निर्णयों में जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। इसी असंतोष के चलते सभी 15 पार्षदों ने एकजुट होकर बैठक का बहिष्कार किया।
एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यदि प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाएगा तो परिषद की बैठकों का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेना जरूरी है।

सीएमओ का पक्ष

वहीं, सीएमओ प्रणव राय ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि परिषद की बैठक बुलाने का अधिकार नगर पालिका अध्यक्ष के पास होता है और बैठक की सूचना पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन नियमों के अनुरूप कार्य कर रहा है और किसी भी प्रकार की मनमानी का सवाल नहीं उठता।
मंत्री से शिकायत की चर्चा


सूत्रों के अनुसार, सीएमओ और पार्षदों के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई है। यह भी चर्चा है कि कुछ पार्षद नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मिलकर पूरे मामले की शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर


परिषद की बैठक नहीं हो पाने से नगर के विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई प्रस्ताव लंबित रह गए हैं, जिन पर निर्णय होना आवश्यक था। यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो प्रशासनिक कामकाज और विकास योजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, यह मामला नगर की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में पार्षदों और प्रशासन के बीच संवाद की स्थिति क्या बनती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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