फर्जी कृषि ऋण मामले में किसानों का आंदोलन तेज, प्रशासन को दी भूख हड़ताल की चेतावनी

72 घंटे बाद भी नहीं मिली राहत, अब भूख हड़ताल की चेतावनी; फर्जी कृषि ऋण और धान बिक्री भुगतान को लेकर किसानों का आंदोलन जारी

72 घंटे बाद भी नहीं टूटी प्रशासन की चुप्पी, अब भूख हड़ताल पर बैठेंगे किसान
रामानुजगंज। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक अंबिकापुर की शाखा के सामने फर्जी कृषि ऋण और धान बिक्री की राशि नहीं मिलने के मामले को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। तीन दिनों से धरने पर बैठे किसानों ने शुक्रवार को एसडीएम के माध्यम से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
उल्लेखनीय है कि बीते कई दिनों से क्षेत्र के किसान बैंक में कथित रूप से दर्ज किए गए फर्जी कृषि ऋण और धान बिक्री भुगतान में हुई अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि उनके खातों में बिना जानकारी और बिना सहमति के कृषि ऋण दर्ज कर दिए गए हैं। इसके कारण कई किसान बैंकिंग सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
धरना दे रहे किसानों का कहना है कि वर्ष 2025-26 एवं वर्ष 2016-17 के धान विक्रय से संबंधित भुगतान भी अनेक किसानों को अब तक नहीं मिला है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। किसानों के अनुसार, फर्जी ऋण और भुगतान संबंधी मामलों की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

किसानों ने बताया कि आंदोलन के दौरान अंबिकापुर से अधिकारियों की एक टीम रामानुजगंज पहुंची थी। अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि अब तक 99 किसानों की शिकायतें दर्ज की गई हैं और उनकी जांच की जा रही है। हालांकि आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि मामला केवल 99 लोगों तक सीमित नहीं है। बैंक से जुड़े हजारों खातों में अनियमितताओं की आशंका है। कई ऐसे किसान भी हैं जिन्हें अभी तक यह पता ही नहीं है कि उनके नाम पर ऋण दर्ज किया जा चुका है।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि लगातार 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो किसी वरिष्ठ अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी हैं और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया गया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय पहुंचकर किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि फर्जी कृषि ऋण के मामलों की व्यापक जांच शुरू नहीं की गई और धान बिक्री की लंबित राशि का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि अब वे भूख हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है। जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई नई पहल सामने नहीं आई थी। वहीं किसानों ने भी साफ कर दिया है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
