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सरकारी चना लापता, सबूत जंगल में – किसने खाया गरीबों का हक?

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बलरामपुर में उजागर हुई बड़ी लापरवाही: जंगल में फेंके गए सरकारी चने के हजारों खाली पैकेट, PDS सिस्टम पर उठे सवाल

बलरामपुर (छत्तीसगढ़): ज़िले में सरकारी खाद्यान्न वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रामानुजगंज-सनावाल मुख्य मार्ग के किनारे, जंगल के पास हजारों सरकारी चना के खाली पैकेट फेंके हुए मिले हैं। ये वही चना हैं जो शासन द्वारा अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त में वितरित किए जाते हैं।

स्थानीय लोगों ने जब इन पैकेट्स को देखा तो उन्होंने तुरंत वीडियो और तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कीं। घटनास्थल पर पाए गए पैकेट्स स्पष्ट रूप से ‘शासकीय वितरण हेतु – बिक्री के लिए नहीं’ मार्किंग वाले थे, जिससे ये तय हो गया कि यह सामग्री सरकारी योजना के तहत बांटी जानी थी।



चना गायब, खाली पैकेट फेंके – गड़बड़ी का खेल?
मौके पर जो हालात देखे गए, उनके मुताबिक यह आशंका जताई जा रही है कि चने को पैकेट से निकाल लिया गया और खाली रैपर्स को ठिकाने लगाने के लिए जंगल में फेंक दिया गया। यानी लाभार्थियों को चना न देकर, चुपचाप उसे बेच दिया गया और पैकेट हटाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।

अनुसूचित जनजातीय इलाकों के लिए भेजा जाता है यह चना


सरकार की योजना के मुताबिक, यह चना आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को पीडीएस दुकानों के माध्यम से मुफ्त या सब्सिडी दरों पर दिया जाता है। लेकिन अब जब हजारों पैकेट खाली हालत में जंगल में मिले हैं, तो पूरा वितरण तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है।



प्रशासन चुप, कार्रवाई की मांग तेज

अब तक प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो पीडीएस जैसी जरूरी योजना पर जनता का भरोसा उठ जाएगा।

आगे क्या?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या ये केवल एक ‘घटना’ बनकर रह जाएगी, या फिर इसमें शामिल अधिकारियों और दुकानदारों पर कानूनी कार्रवाई होगी?

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