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गो सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान, 27 अप्रैल को देशभर में सौंपे जाएंगे ज्ञापन


गो सेवा, सुरक्षा और सम्मान के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान, 27 अप्रैल से होगा पहला चरण शुरू


देशभर में गो सेवा, सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक व्यापक जनअभियान शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य गोवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों को शासन और प्रशासन के सामने संगठित रूप से रखना है। “गो सम्मान आह्वान अभियान” के नाम से चल रहे इस प्रयास के तहत 27 अप्रैल 2026 और 27 जुलाई 2026 को “गो सम्मान दिवस” के रूप में मनाने का आह्वान किया गया है।
अभियान से जुड़े संतों और गोप्रेमियों ने देश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इन तिथियों पर अपने-अपने तहसील, ब्लॉक, अनुमंडल और जिला मुख्यालयों पर पहुंचकर संबंधित अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपें।


देशव्यापी संगठनात्मक ढांचा तैयार
अभियान को मजबूत आधार देने के लिए देश के लगभग 780 जिलों में प्रत्येक जिले से 3 संत और 3 समर्पित गोभक्तों को जोड़ा जाएगा। ये कार्यकर्ता आगे प्रत्येक तहसील स्तर पर कम से कम 3 गोभक्तों और 3 संतों को जोड़ेंगे। इस प्रकार देश की लगभग 5000 तहसीलों में एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो गांव स्तर तक जनसंपर्क और प्रचार-प्रसार करेगा।
दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक पांच महीनों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की योजना बनाई गई है।
प्रमुख मांगें: गोशाला, संरक्षण और संसाधन
अभियान में गोवंश संरक्षण और गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं:
प्रत्येक राज्य में उपयुक्त वन या गोचर भूमि पर कम से कम एक गो अभ्यारण्य स्थापित किया जाए।
हर ग्राम पंचायत स्तर पर निराश्रित गोवंश के लिए नंदीशाला बनाई जाए।
गौशालाओं को मनरेगा से जोड़कर वहां कार्य करने वालों को 100 दिन का रोजगार और वेतन सुनिश्चित किया जाए।
गोवंश की संख्या के आधार पर गौशालाओं को मुफ्त बिजली या बिजली बिल में छूट दी जाए।
सरकारी नियंत्रण वाले अधिक आय वाले मंदिरों के साथ गौशाला संचालन अनिवार्य किया जाए।
महानगरों में आवासीय परियोजनाओं में गौशाला के लिए स्थान आरक्षित करना बिल्डरों के लिए अनिवार्य किया जाए।
मृत गोवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए सरकार द्वारा विशेष स्थान और व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
सख्त कानूनों की मांग
अभियान के अंतर्गत गो तस्करी और गो हत्या के खिलाफ कड़े कानून बनाने की भी मांग उठाई गई है:
गो हत्या और तस्करी में शामिल दोषियों के लिए आजीवन कठोर कारावास का प्रावधान।
तस्करी में उपयोग होने वाले वाहनों की स्थायी जब्ती और नीलामी या गौशालाओं को हस्तांतरण।
कंपनियों के CSR फंड का एक निश्चित हिस्सा गो सेवा के लिए अनिवार्य करना।
सिंगल यूज पॉलीथिन पर सख्त प्रतिबंध और उसके उचित निस्तारण की व्यवस्था।
पशु मेलों के नाम पर हो रही अवैध तस्करी को रोकने के लिए

केंद्रीय कानून बनाना।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसंधान पर जोर
अभियान में गोवंश आधारित स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सुधारों की भी मांग की गई है:
जिला स्तर पर पंचगव्य आधारित चिकित्सालयों की स्थापना।
मिड-डे मील में देशी गाय के दूध या उसके उत्पादों को शामिल करना।
संस्कृत महाविद्यालयों में गोसेवा प्रकल्प अनिवार्य करना।
स्कूलों और कॉलेजों में गोवंश के वैज्ञानिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व पर अध्ययन अनिवार्य करना।
राजमार्गों पर गो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर 50 किमी पर एम्बुलेंस और हर 150–200 किमी पर गो चिकित्सालय की व्यवस्था।


चार चरणों में चलेगा 16 माह का अभियान
यह अभियान चार चरणों में लगभग 16 महीनों तक संचालित किया जाएगा:-


पहला चरण (तहसील स्तर)
27 अप्रैल 2026 को सभी तहसील/ब्लॉक मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा जाएगा।


दूसरा चरण (जिला स्तर)
27 जुलाई 2026 को प्रतिक्रिया के आधार पर धन्यवाद पत्र या पुनः ज्ञापन दिया जाएगा।


तीसरा चरण (राज्य स्तर)
27 अक्टूबर 2026 को राज्य की राजधानियों में जाकर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।


चौथा चरण (राष्ट्रीय स्तर)
यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता है, तो फरवरी 2027 में देशभर से लाखों गोभक्त दिल्ली में एकत्र होकर शांतिपूर्ण संकीर्तन और प्रार्थना के माध्यम से अपनी बात रखेंगे।
यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकलता, तो 16 अगस्त 2027 से क्रमिक आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।


अहिंसक और गैर-राजनीतिक स्वरूप
अभियान के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह अहिंसक और गैर-राजनीतिक रहेगा। इसमें किसी भी राजनीतिक दल, नेता या संगठन का प्रचार नहीं किया जाएगा। किसी भी प्रकार के भाषण, मंच या माइक का उपयोग नहीं होगा और केवल संकीर्तन, रैली और ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखी जाएगी।
अभियान में किसी भी प्रकार का चंदा नहीं लिया जाएगा और केवल गोमाता और नंदी के चित्रों का ही उपयोग प्रचार सामग्री में किया जाएगा।


सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपील
27 अप्रैल 2026 को देशभर के नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे गो सेवा, सुरक्षा और सम्मान के समर्थन में प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया पर संदेश (ट्वीट) भेजें।

(गो सम्मान आह्वान अभियान देशभर में एक बड़े जनआंदोलन के रूप में आकार लेता दिख रहा है, जिसका उद्देश्य गोवंश संरक्षण से जुड़े मुद्दों को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से शासन तक पहुंचाना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अभियान को कितनी जनसमर्थन मिलता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।)

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