त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25: आरक्षण प्रक्रिया की तैयारी पूर्ण

त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25: बलरामपुर में पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया 28 दिसंबर को
छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशानुसार, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन 2024-25 के तहत आरक्षण प्रक्रिया 28 दिसंबर 2024 को आयोजित की जाएगी। इस प्रक्रिया में जिला पंचायत के सदस्य, जनपद पंचायत के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंचों के पदों के लिए वर्गवार आरक्षण और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा।
यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 और अन्य संबंधित नियमों के अनुसार पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी। जिला प्रशासन ने इस आयोजन के लिए विस्तृत तैयारियाँ की हैं, और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को प्रभारी नियुक्त किया गया है।
आरक्षण प्रक्रिया के मुख्य विवरण
1. जिला पंचायत के सदस्य और जनपद पंचायत के अध्यक्ष एवं सदस्यों का आरक्षण
प्रभारी अधिकारी: अपर कलेक्टर इन्द्रजीत बर्मन
जिला पंचायत में सदस्य पदों और जनपद पंचायत में अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए आरक्षण प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी ढंग से संपन्न करने की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर को सौंपी गई है।
2. ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंचों का आरक्षण
तिथि और समय: 28 दिसंबर 2024, प्रातः 10:00 बजे
स्थान: संबंधित जनपद पंचायत के सभाकक्ष
प्रभारी अधिकारी: संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)
ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की प्रक्रिया प्रत्येक जनपद पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की जाएगी। संबंधित राजस्व अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को इसके लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक तैयारियाँ
जिला कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा ने आरक्षण प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि आरक्षण प्रक्रिया सभी नियमों और निर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्ष रूप से की जाए।
आरक्षण प्रक्रिया में पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश
1. प्रवर्गवार आरक्षण:
अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामान्य वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण।
महिलाओं के लिए प्रत्येक प्रवर्ग में 50% सीटों का आरक्षण।
2. पारदर्शिता और निष्पक्षता:
आरक्षण प्रक्रिया का आयोजन सार्वजनिक रूप से होगा।
यह प्रक्रिया निर्धारित समय और स्थान पर आयोजित की जाएगी, जिसमें जनता की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी।
सभी प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से कार्य करें।
आरक्षण सूची तैयार करने और इसे सार्वजनिक रूप से घोषित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
महिलाओं के लिए आरक्षण
महिलाओं को ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा। यह कदम ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।
। वर्गीय संतुलन ।
आरक्षण प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इससे पंचायतों में हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित होगी।
समुदाय की भागीदारी
आरक्षण प्रक्रिया में जनता और समुदाय की उपस्थिति पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने में सहायक होगी।
आरक्षण प्रक्रिया का महत्व
1. पंचायत चुनावों के लिए आधार तैयार करना:
आरक्षण प्रक्रिया आगामी पंचायत चुनावों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। इससे उम्मीदवारों और मतदाताओं को चुनाव के लिए स्पष्टता मिलेगी।
2. सामाजिक न्याय को बढ़ावा:
प्रवर्गवार और महिलाओं के लिए आरक्षण से सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा और वंचित वर्गों को सत्ता में भागीदारी का अवसर मिलेगा।
3. महिला सशक्तिकरण:
पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित होने से उनके राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
प्रत्याशियों और जनता के लिए निर्देश
आरक्षण प्रक्रिया में उपस्थित रहने वाले इच्छुक प्रत्याशियों को समय पर संबंधित स्थान पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।
ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत के निवासियों को भी आरक्षण प्रक्रिया में शामिल होकर इसे पारदर्शी बनाने में सहयोग करने का अनुरोध किया गया है।
त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के तहत आरक्षण प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पहल है, जो स्थानीय शासन में सभी वर्गों और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करती है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 28 दिसंबर को आयोजित होने वाली इस प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।
यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता और निष्पक्षता का परिचायक होगी, बल्कि लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में भी सहायक होगी। पंचायतों में सभी वर्गों की समान भागीदारी से विकास की दिशा में नया कदम उठाया जाएगा।




