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वन वाटिका, रामानुजगंज में मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व विषय पर संगोष्ठी संपन्न


वन प्राणी संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत मानव–वन प्राणी सह-अस्तित्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को वन प्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर वन वाटिका, रामानुजगंज परिक्षेत्र में “मानव–वन प्राणी सह-अस्तित्व” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानव और वन्य जीवों के बीच सामंजस्य एवं सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय समुदाय को वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।



कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, सरपंचगण, बी.डी.सी. सदस्य, ग्रामीणजन, हाथी विशेषज्ञ अमलेंदु मिश्रा, एस.डी.ओ. बलरामपुर, आर.ओ. धमनी, आर.ओ. रामानुजगंज सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात् एसडीओ बलरामपुर द्वारा वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के उद्देश्य एवं इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि वन्य प्राणी हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके संरक्षण से ही पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।



हाथी विशेषज्ञ  अमलेंदु मिश्रा ने अपने वक्तव्य में क्षेत्र में बढ़ती मानव–हाथी संघर्ष की घटनाओं पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों को समझने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने एवं आपसी सहयोग के माध्यम से संघर्ष की स्थितियों को कम करने के उपाय बताए।  मिश्रा ने कहा कि मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व तभी संभव है जब हम उनके प्राकृतिक आवास का सम्मान करें और संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।



आर.ओ. धमनी एवं आर.ओ. रामानुजगंज ने अपने वक्तव्यों में बताया कि विभाग द्वारा मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने हेतु कई जागरूकता अभियान, गश्ती दल एवं त्वरित राहत दल गठित किए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी वन्य प्राणी के आगमन की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय पर कार्यवाही की जा सके।

कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भी अपने विचार साझा किए और वन्य जीव संरक्षण में सहयोग का आश्वासन दिया। संगोष्ठी के अंत में उपस्थित जनसमूह को वन्य जीव संरक्षण की शपथ दिलाई गई तथा जागरूकता संबंधी पुस्तिकाएँ वितरित की गईं।

अंत में एसडीओ बलरामपुर ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन मानव और वन्य जीवों के बीच समझ एवं सह-अस्तित्व की भावना को सशक्त बनाते हैं।

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