बलरामपुर

बच्चों को मिल रहा है पौष्टिक आहार पोषण वाटिका से जिला प्रशासन कर रहा है पोषण वाटिका लगाने के लिए प्रेरित

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड कुसमी के सेक्टर नवाडीहकला के आंगनबाड़ी केन्द्र भोजपुर का पोषण वाटिका लोगों के लिए आकर्षण एवं कौतूहल का विषय बना हुआ है। यहां पर विभिन्न साग-सब्जियों का उत्पादन जैविक खाद से किया जा रहा है, जिसे बच्चे स्वयं उपभोग करते हैं और इस प्रकार उन्हें अतिरिक्त पोषण आहार प्राप्त हो रहा है।
भोजपुर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कलावती एवं सहायिका मीना पैंकरा के द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र से लगे खाली जमीन का घेराव कर वाटिका तैयार किया गया तथा वाटिका में विभिन्न प्रकार के साग-सब्जी, मूली, धनिया, फूलगोभी, पत्तागोभी, सरसों, आलू, टमाटर एवं अन्य साग-सब्जियां लगाए गए हैं साथ ही आंगनबाड़ी के सामने पपीता, मुगना एवं आम के पौधे भी लगाये गये हैं, जो मौसम के अनुसार फल देते हैं।

पपीता एवं मुनगा का फल आंगनबाड़ी केन्द्र में सब्जी के रूप में उपयोग किया जा रहा है तथा वाटिका से प्राप्त ताजी हरी सब्जियां केन्द्र में बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को दिया जा रहा है। वाटिका में अच्छे उत्पादन के लिए बाजार के रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक दवाईयों के उपयोग के बजाय स्वयं के द्वारा उत्पादित जैविक खाद का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे बच्चों एवं गर्भवती माताओं को भरपूर पोषण मिल रहा है तथा उनके सेहत में सुधार आया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कलावती ने बताया कि पोषण वाटिका से पर्यावरण संरक्षण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी हुआ है। वाटिका में फलदार पौधे मुनगा, पपीता, अमरूद, जामुन, अनार, आम एवं सीताफल इत्यादि के पौधे भी लगाये गए हैं। इसके अलावा सजावटी पौधे भी लगाये गये हैं। पोषण वाटिका से अनेक फायदे मिलते हैं साथ ही ताजी हरी सब्जियां भी प्राप्त होती हैं, बाजार से सब्जियां नहीं खरीदनी पड़ती, जिससे पैसों की भी बचत होती है। पोषण वाटिका से प्राप्त सब्जियों के द्वारा बच्चों एवं महिलाओं में कुपोषण एवं एनीमिया की दर में कमी होती है साथ ही बीमारियों से लड़ने की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कलावती एवं सहायिका श्रीमती मीना पैकरा ने कहा कि सभी के घरों के आसपास बाड़ी होता है, जिसे वाटिका के रूप में विकसित कर उसमें हरी साग-भाजी, टमाटर, फूलगोभी-पत्तागोभी, मिर्च, आलु, मुनगा, पपीता व अन्य फलदार पौधे लगाया जाये, जिससे हरी, ताजी, साग-सब्जियां प्राप्त होगी एवं एनीमिया व कुपोषण से मुक्ति मिलेगी तथा पोषण के स्तर में सुधार होगा।

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