कोरियाछत्तीसगढ़

व्यंग्यकार गिरीश पंकज का ग्रह ग्राम में हुआ सम्मान,साहित्यकारों ने किया सम्मानित

कोरिया। संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान ने अपने गरिमामय आयोजन में राष्ट्र के प्रख्यात व्यंग्यकार साहित्यकार कवि तथा संबोधन के संस्थापक सदस्य गिरीश पंकज के सम्मान में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह सम्मान समारोह कार्यक्रम मनेन्द्रगढ़ के श्री राम मंदिर प्रांगण स्थित संबोधन वाचनालय में हुआ। इस अवसर पर संबोधन संस्था द्वारा गिरीश पंकज का सम्मान साल श्रीफल भेंट कर तथा स्मृति चिन्ह देकर किया गया। कार्यक्रम संचालक तथा संस्था सचिव नरेंद्र अरोड़ा ने मुख्य अतिथि गिरीश पंकज एवं समस्त सदस्यों का स्वागत किया उन्होंने कहां की विगत 13 फरवरी 2021 को हिंदी भवन नई दिल्ली में गिरीश पंकज को व्यंग का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदाय किया गया आज भी 13 फरवरी है संबोधन के सभी सदस्य आज अपने संस्थापक सदस्य का सम्मान कर अत्यंत अभिभूत हैं तत्पश्चात संस्था सदस्य उपकार शर्मा की गजल ना किसी का आंख का नूर हूं ना किसी के दिल का करार हूं की दिलकश प्रस्तुति ने समा बांध दिया संस्था के वरिष्ठ तथा संस्थापक सदस्य जगदीश पाठक ने चर्चित व्यंग्यकार ने पंकज का सारगर्भित परिचय देते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में रोचक जानकारी दी जिसमें तत्कालीन संबोधन संस्था की स्थापना एवं प्रथम काव्य गोष्टी के आयोजन के बारे में जानकारी बताई संस्था के नारायण तिवारी ने कहां की हमारे लिए अत्यंत गौरव की बात है कि हिंदी साहित्य की राष्ट्रीय पहचान आज पंकज के द्वारा मनेंद्रगढ़ और संबोधन की है वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय ने रोचक संस्करणों के माध्यम से गिरीश जी का परिचय देते हुए कहा कि कि वे बेबाकी और अन्याय के विरुद्ध सशक्त एवं बुलंद आवाज है उनकी रचनाएं राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्र-पत्रिकाओं में सदैव प्रकाशित होती है अभी हाल में ही उनकी रचनाओं को तमिलनाडु केंद्र विद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

वहीं संतोष जैन ने गिरीश पंकज की अविरल साहित्य प्रवाह की सारगर्भित जानकारी दी सम्मान समारोह के दौरान गिरीश पंकज ने अपने उद्बोधन कहा कि मनेंद्रगढ़ मेरी मातृभूमि है मेरी रचनाओं में मनेंद्रगढ़ है जब मैं यहां नहीं आता तो मेरी रचनाओं में मनेंद्रगढ़ आता है उन्होंने संबोधन संस्था के शुरुआती दौर के संस्मरण को बताया उनके द्वारा सरगुजा समाज तथा तथा बाल कला केंद्र संस्था का गठन उनके द्वारा किया गया यहां से प्रकाशित मासिक पत्रिका वन्य जा मैं पंकज की कविताओं के प्रकाशन से उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत हुई 1974 में उन्होंने प्रथम व्यंग लिखा 1984 में बैचलर आफ जर्नलिज्म किया विदित हो कि श्री पंकज नवभारत दैनिक भास्कर सहित कई ख्याति प्राप्त समाचार पत्र में बतौर संपादक रह चुके हैं तत्पश्चात स्वतंत्र पत्रकार का दायित्व निर्वहन करने की ठान ली श्री पंकज ने वर्तमान साहित्यकारों पत्रकारों रचनाकारों का संदेश देते हुए कहा कि एक लेखक को लोक कल्याणकारी उद्देश्य रचनाएं लिखना चाहिए लेखन में संदेश होना चाहिए लोकहित एवं जनकल्याणकारी लेखन ही समाज को उच्च शिखर पर ले कर जाएगा उन्होंने संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान द्वारा किए गए सम्मान के लिए धन्यवाद दिया संस्था अध्यक्ष विनोद तिवारी ने गिरीश पंकज को संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान की आजीवन मानद सदस्य बनाए जाने की घोषणा की गई उन्होंने संस्था की ओर से गिरीश पंकज के उज्जवल एवं सुखी जीवन की शुभकामनाएं दी संस्था के सचिव संजय ताम्रकार ने संस्था के संस्थापक सदस्य गिरीश पंकज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आज के इस कार्यक्रम में पधारने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया इस कार्यक्रम में संबोधन संस्थान के सदस्यों अरविंद वैश्य मृत्युंजय सोनी आदि की भी उपस्थित रही

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