जीर्णोद्धार के नाम पर 1.75 लाख खर्च, सड़क बनी दलदल,ग्रामीणों ने लगाया धान का रोपा
जीर्णोद्धार के नाम पर 1.75 लाख रुपये खर्च, फिर भी सड़क बनी दलदल

जीर्णोद्धार के नाम पर 1.75 लाख रुपये खर्च, फिर भी सड़क बनी दलदल
मुरम की जगह मिट्टी डालने का आरोप, 2 से 3 फीट कीचड़ में फंसा आवागमन; ग्रामीणों ने सड़क पर धान का रोपा लगाकर जताया विरोध
महावीरगंज। ग्राम पंचायत महावीरगंज में अनिल के घर से कोटवारी बांध तक सड़क जीर्णोद्धार के नाम पर 15वें वित्त की राशि से 1 लाख 75 हजार रुपये आहरण किए जाने के बाद सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क सुधारने के लिए मुरम डालने के बजाय मिट्टी पाट दी गई, जिसके कारण बारिश के बाद सड़क की हालत और खराब हो गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क पर मिट्टी डालने के बाद बारिश होते ही जगह-जगह भारी कीचड़ और दलदल बन गई। कई स्थानों पर करीब 2 से 3 फीट तक दलदल होने की बात कही जा रही है। इससे पैदल आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दोपहिया वाहनों के फिसलने और फंसने का खतरा बना हुआ है।

सुधार के बजाय और बिगड़ गई सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के जीर्णोद्धार से उन्हें बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन काम के बाद सड़क की स्थिति पहले से भी खराब हो गई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि सड़क जीर्णोद्धार के लिए राशि खर्च की गई है तो मौके पर किए गए कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब क्यों है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर उचित तरीके से मुरम डालकर उसका समतलीकरण और मजबूतीकरण किया जाता तो बारिश में इस तरह की स्थिति नहीं बनती। मिट्टी डालने के कारण पानी भरने के बाद सड़क दलदल में तब्दील हो गई है।

दलदल में धान का रोपा लगाकर किया विरोध
सड़क की बदहाल स्थिति के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने सड़क पर जमा कीचड़ और दलदल में धान का रोपा लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि अब यह सड़क कम और धान का खेत ज्यादा नजर आ रही है।
ग्रामीणों के इस विरोध का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने के बाद सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण करने की मांग की है।
राशि के उपयोग और कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग
ग्रामीणों ने 15वें वित्त की राशि से आहरित 1.75 लाख रुपये की राशि और सड़क पर किए गए कार्य की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कार्य में कितनी राशि खर्च हुई, किस सामग्री का उपयोग किया गया और सड़क निर्माण के लिए क्या मापदंड निर्धारित किए गए थे, इसकी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और यदि कार्य में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही सड़क को जल्द दुरुस्त कर आवागमन योग्य बनाने की मांग भी की गई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों के विरोध और सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल कागजों में जीर्णोद्धार न हो, बल्कि मौके पर सड़क को वास्तव में आवागमन योग्य बनाया जाए।



