
भारत सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ, स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री और खेल मंत्रालय के सहयोग से 38वें नेशनल गेम्स का आयोजन उत्तराखंड में 28 जनवरी से 14 फरवरी तक किया जा रहा है। इन राष्ट्रीय खेलों को भारत का “ओलंपिक” माना जाता है, और यह देश के खेल इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल देशभर की खेल प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना है, बल्कि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं जैसे एशियाई खेलों और ओलंपिक में भाग लेने के लिए प्रेरित और तैयार करना भी है।
10,000 से अधिक एथलीट, अधिकारी और कोच इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनेंगे। इसमें सभी प्रमुख भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी अनिवार्य है, क्योंकि यह आयोजन उनके लिए अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का रास्ता खोलता है।
छत्तीसगढ़ का विशेष योगदान
छत्तीसगढ़ मल्लखंब टीम के खिलाड़ियों ने इस बार विशेष पहचान बनाई है। टीम के अधिकतर खिलाड़ी नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ मल्लखंब और स्पोर्ट्स अकादमी से हैं। इन खिलाड़ियों का चयन छत्तीसगढ़ मल्लखंब संघ और उसके पदाधिकारियों द्वारा किया गया है। टीम में कुल 12 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें से दो खिलाड़ी जांजगीर-चांपा जिले से हैं। इनका चयन और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है।
मंत्री और प्रशासन की शुभकामनाएं
इस मौके पर छत्तीसगढ़ के वन और जल मंत्री केदार कश्यप, नारायणपुर की जिला कलेक्टर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगाई, जिला पंचायत सीईओ आकांक्षा सिंह खलखो, नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार और रक्षित निरीक्षक मोसिन खान ने अबूझमाड़ मल्लखंब और स्पोर्ट्स अकादमी के सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मुख्य कोच श्री मनोज प्रसाद और सहायक कोच नरेंद्र गोटा को भी उनके प्रयासों के लिए बधाई दी।
राष्ट्रीय खेलों का महत्व
उत्तराखंड में आयोजित होने वाला यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर निखारने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह आयोजन उत्तराखंड के लिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि यह राज्य पहली बार इतने बड़े खेल आयोजन की मेजबानी कर रहा है।
राष्ट्रीय खेल हमारे देश की खेल प्रतिभाओं का उत्सव हैं, जो पूरे देश को खेलों के माध्यम से जोड़ते हैं। इस बार का आयोजन न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि खेल प्रेमियों के लिए भी उत्साह और प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की उपलब्धि और उनकी मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, कड़ी मेहनत और समर्पण से बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। यह आयोजन निश्चित रूप से भारत के खेलों को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगा और देश की खेल संस्कृति को और समृद्ध करेगा।


