
बलरामपुर नगर निकाय चुनाव: मतगणना से पहले बढ़ी प्रत्याशियों की धड़कनें, भीतरघात और धनबल की चर्चा जोरों पर
मतदान संपन्न, अब मतगणना पर टिकी निगाहें
बलरामपुर जिले की दो नगर परिषदों और चार नगर पंचायतों में 11 फरवरी को मतदान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। अब 15 फरवरी को मतगणना होनी है, जिससे सभी प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशी अपनी समीक्षात्मक बैठकों में व्यस्त हैं और वोटों का आकलन कर रहे हैं।
रामानुजगंज नगर परिषद बना चुनावी केंद्र
इस बार रामानुजगंज नगर परिषद चुनावी चर्चा के केंद्र में रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस के साथ निर्दलीय प्रत्याशी ने भी जोरदार टक्कर दी।
- भाजपा से रमन अग्रवाल अध्यक्ष पद के प्रत्याशी थे।
- कांग्रेस से मधु गुप्ता मैदान में उतरीं।
- निर्दलीय प्रत्याशी राहुल जीत सिंह ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
तीनों प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी, और मतदाताओं को रिझाने के लिए हर संभव रणनीति अपनाई।
सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
इस चुनाव में सोशल मीडिया का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हुआ। व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य प्लेटफॉर्म पर चुनावी प्रचार चरम पर था। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार, शासकीय भूमि कब्जा, और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जमकर वायरल हुए, जिससे मतदाताओं पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना बनी।
निर्दलीय प्रत्याशी ने बढ़ाई बड़ी पार्टियों की मुश्किलें
निर्दलीय प्रत्याशी राहुल जीत सिंह ने इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। उनकी मजबूत उपस्थिति से भाजपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना बढ़ गई है।
चुनाव में धनबल के इस्तेमाल की चर्चा
चुनावी चर्चा में यह बात सामने आ रही है कि वोटरों को लुभाने के लिए धनबल का भी जमकर इस्तेमाल किया गया। चर्चा है कि एक वोट के लिए 5,000 से 10,000 रुपये तक की पेशकश की गई। इसके अलावा, चुनाव प्रचार में प्रत्याशियों ने लगभग 2.5 करोड़ रुपये तक खर्च किए।
10 फरवरी की रात को दोनों प्रमुख प्रत्याशियों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए हर संभव प्रयास किया।
भीतरघात की चर्चाएं तेज
चुनाव में भीतरघात (क्रॉस वोटिंग) की खबरें भी सामने आ रही हैं। कुछ वार्डों में पार्टी के अंदर ही असंतोष की खबरें मिल रही हैं, जिससे उम्मीदवारों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अब फैसले की घड़ी नजदीक
अब 15 फरवरी को यह तय होगा कि रामानुजगंज नगर परिषद और अन्य निकायों में जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है। इस बार के चुनाव में भीतरघात, धनबल और सोशल मीडिया प्रचार की बड़ी भूमिका रही है, जिससे नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं। फिलहाल प्रत्याशी और उनके समर्थक मतगणना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।



