26.47 करोड़ के सहकारी बैंक घोटाले में बलरामपुर पुलिस का बड़ा एक्शन – 11 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

“अपराध और अपराधियों के खिलाफ बलरामपुर पुलिस का अभियान जारी”
बलरामपुर जिले की कुसमी और शंकरगढ़ शाखाओं में पदस्थ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितता कर गबन किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बलरामपुर पुलिस ने इस संगठित वित्तीय षड्यंत्र में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि अन्य संलिप्त व्यक्तियों व फर्जी खातों की जांच अभी भी जारी है।
मामला दर्ज – अपराध क्रमांक 39/2025
थाना: कुसमी, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.)
धाराएं: IPC की धाराएं 409, 420, 467, 468, 471, 120B, 34
प्रार्थी: अरविन्द श्रीवास्तव, प्रभारी शाखा प्रबंधक
संवेदनशीलता: 26.47 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति
मामला कैसे उजागर हुआ?
जनवरी 2025 में नाबार्ड द्वारा ईमेल के माध्यम से एक शिकायत की जानकारी मिली, जिसमें जनपद पंचायत शंकरगढ़ के सीईओ ने तीन संदिग्ध बैंक खातों में लेन-देन को लेकर चिंता जताई। इसके बाद बैंक द्वारा एक आंतरिक जांच समिति गठित की गई, जिसकी निष्क्रियता के चलते नवीन उपाध्याय एंड एसोसिएट्स से फ्लैश ऑडिट कराया गया।

प्रारंभिक ऑडिट रिपोर्ट:
कुल गबन की राशि: ₹23,74,05,608
विशेष अंकेक्षण में (05/04/2025): यह बढ़कर ₹26,47,82,462.93 हो गई
फर्जी खातों के माध्यम से गबन की विस्तृत रूपरेखा:
1. AJSS SAMITI JAMDI SHAN (कुसमी शाखा):
₹19.24 करोड़ की क्रेडिट एंट्री और ₹19.22 करोड़ की डेबिट
खाताधारक के दस्तावेज, KYC और हस्ताक्षर फर्जी पाए गए
सहायक प्रबंधक ने खाता को पूरी तरह फर्जी बताया
2. जमुना अलंकार खाता:
₹1.82 करोड़ NEFT ट्रांजेक्शन
44 में से 52 ट्रांजेक्शन में वाउचर और दस्तावेज अनुपलब्ध
3. नरेगा धनेशपुर खाता (कुसमी शाखा):
₹3.19 करोड़ का लेन-देन
KYC, फॉर्म, दस्तावेज गायब, हस्ताक्षर फर्जी
4. CEO Janpad Panchayat Shankargarh खाता:
₹91.57 लाख की राशि किसानों के खातों से ट्रांसफर
जनपद सीईओ ने खाता को पूरी तरह फर्जी घोषित किया
5. अन्य खातों में लेन-देन:
अशोक सोनी: ₹1.36 करोड़
प्रकाश कुमार सिंह: ₹46.44 लाख
सुदेश कुमार यादव: ₹96.36 लाख
महामाया कंस्ट्रक्शन: ₹30 लाख NEFT
पुलिस की कार्रवाई:
बलरामपुर पुलिस ने EOW और CBI जैसी एजेंसियों के स्तर पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया।पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा दीपक झा, एसपी वैभव बैंकर और एसडीओपी इम्मानुएल लकड़ा के नेतृत्व में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
नाम पद निवास

बड़ा सवाल:
2012 से संचालित फर्जी खातों की जानकारी सालाना बैंक ऑडिट में क्यों नहीं आई?
ऑडिट टीमों की भूमिका संदेह के घेरे में है। यह सवाल जांच एजेंसियों की ओर सीधा इशारा करता है।
जांच की अगली कड़ी:
फर्जी खातों से जुड़े शेष व्यक्ति और कंपनियों की तलाश
तकनीकी और फॉरेंसिक विश्लेषण
बैंकिंग ऑडिट प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न
यह घोटाला न केवल आर्थिक भ्रष्टाचार का मामला है, बल्कि किसानों की योजनाओं, शासन की नीतियों और जनता के विश्वास पर हमला है। बलरामपुर पुलिस की तत्परता और कठोर कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत काम हो रहा है।
बलरामपुर पुलिस का अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध अभियान जारी है और प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।



