छत्तीसगढ़जसपुरदिल्लीबलरामपुरबलौदा बाजारबिलासपुरभरतपुर सोनहतमहेंद्रगढ़मुंबईराजपुरराज्यसभारामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायगढ़रायपुररायपुर

आदिवासी बच्चों को शिक्षा से दूर, शराब को नज़दीक ला रही है सरकार: कांग्रेस

छत्तीसगढ़ सरकार की नई नीति से आदिवासी विद्यार्थियों की उम्मीदों पर गिरी गाज

छात्रवृत्ति पर शर्तें, सहायता में कटौती, सुविधाएं बंद — तेंदूपत्ता संग्राहकों के खिलाफ खुला मोर्चा

बलरामपुर/राजपुर।
भाजपा सरकार द्वारा लघु वनोपज संग्राहक आदिवासी परिवारों की छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में किए गए संशोधनों को लेकर गहरा आक्रोश है। कांग्रेस प्रवक्ता और ब्लॉक अध्यक्ष लालसाय मिंज ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि मौजूदा सरकार गरीबों और आदिवासियों के हितों के खिलाफ काम कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा स्पष्ट है — शिक्षा से गरीब बच्चों को वंचित करना और शराब की दुकानों को बढ़ावा देना। यह दोहरी नीति न केवल असंवेदनशील है बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रतीक भी बन गई है।

छात्रवृत्ति योजना को किया गया सीमित, प्रतिभाएं हो रहीं बाहर

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित ने 16 मई 2025 को एक निर्णय लिया, जिसके तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 से छात्रवृत्ति पाने की पात्रता में भारी बदलाव किया गया है।

अब केवल उन्हीं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलेगी जो:

कक्षा 10वीं और 12वीं में 90% या उससे अधिक अंक लाएं।


जबकि पूर्व में यह सीमा 75% थी और

10वीं में ₹15,000,

12वीं में ₹25,000 छात्रवृत्ति दी जाती थी।


नई व्यवस्था के तहत हजारों विद्यार्थी योजना से स्वतः बाहर हो जाएंगे। जिन बच्चों ने इस बार भी 75% से अधिक अंक लाए हैं — जैसे प्रियंका, रेशमा, विनीता, मोनिका, आस्था और महेश, उन्हें कोई सहायता नहीं मिलेगी।

लालसाय मिंज ने कहा, “जब शिक्षा सुविधाएं ही सीमित हैं, तब 75% लाना ही इन बच्चों के लिए बड़ी बात होती है। 90% की शर्त लगाकर सरकार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला तेंदूपत्ता संग्राहकों की प्रतिभाओं को हतोत्साहित करने वाला है। इन बदलावों के जरिए सहकारी संघ ने लगभग ₹15 करोड़ की बचत कर ली है, लेकिन इसकी कीमत इन बच्चों को अपने भविष्य से चुकानी पड़ रही है।


सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी चपेट में, प्राकृतिक आपदा में सहायता बंद

मिंज ने आरोप लगाया कि केवल छात्रवृत्ति ही नहीं, बल्कि मृत्यु या प्राकृतिक आपदा में मिलने वाली सहायता भी बंद कर दी गई है या सीमित कर दी गई है।

पूर्व में:

18 से 59 वर्ष की मृत्यु पर ₹30,000 से ₹4 लाख तक की सहायता मिलती थी।

18 से 60 वर्ष के किसी सदस्य की मृत्यु पर ₹12,000 की राशि मिलती थी।
अब:
सहायता केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगी जो 500 गड्डी या उससे अधिक तेंदूपत्ता संग्रह करते हैं।

यानी छोटे संग्राहक पूरी तरह बाहर कर दिए गए हैं।


पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन में ये योजनाएं “शहीद महेंद्र कर्मा योजना”, “समूह बीमा योजना”, “जनश्री बीमा योजना” के नाम से चलती थीं। वर्तमान सरकार ने इनके नाम

Related Articles

Back to top button