स्वास्थ्य सचिव के आदेश पर विवाद, मंत्री ने लगाई तत्काल रोक

छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों में मीडिया प्रवेश पर रोक का आदेश वापस, स्वास्थ्य मंत्री ने जताया खेद
रायपुर, 13 जून 2025 — छत्तीसगढ़ राज्य में पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक आदेश ने अचानक तूफान खड़ा कर दिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक विवादास्पद आदेश में राज्य के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मीडिया के प्रवेश को प्रभारी अधिकारी की अनुमति से जोड़ दिया गया था। इस आदेश के मुताबिक, “बिना संबंधित प्रभारी अधिकारी की अनुमति के कोई भी मीडिया कर्मी अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता।”
क्या था आदेश



राज्य के स्वास्थ्य विभाग के सचिव द्वारा 13 जून को यह आदेश जारी किया गया था। इसके तहत सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों और जिला चिकित्सालयों को निर्देशित किया गया कि मीडिया प्रतिनिधियों को बिना पूर्व अनुमति स्वास्थ्य संस्थानों में प्रवेश की अनुमति न दी जाए। आदेश में इसका कारण संवेदनशीलता और मरीजों की निजता का हवाला दिया गया था।
पत्रकार संगठनों और मीडिया का तीखा विरोध
आदेश जारी होते ही राज्यभर के पत्रकारों और मीडिया संस्थानों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा। कई वरिष्ठ पत्रकारों, प्रेस संगठनों और संपादकों ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला बताया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और अन्य शहरों में भी पत्रकारों ने विरोध दर्ज करवाए ।
स्वास्थ्य मंत्री को सफाई देनी पड़ी
मीडिया और जनद
बाव को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को स्थिति स्पष्ट करने के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा:
“हमारे लिए मीडिया का सम्मान सर्वोपरि है। जो आदेश जारी हुआ है, वह बिना व्यापक विचार-विमर्श के था। मैं व्यक्तिगत रूप से इस आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित करता हूं।”
मंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य सचिव विदेश दौरे पर हैं, और उनके अनुपस्थिति में यह निर्णय लिया गया था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी ऐसे निर्णय से पहले मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत की जाएगी।
आदेश पर रोक और आगे की प्रक्रिया
श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने विभागीय स्तर पर आदेश को “तत्काल रोकने” के निर्देश दे दिए हैं। साथ ही यह भी कहा कि मीडिया की भूमिका लोकतंत्र में आवश्यक है और ऐसे किसी भी प्रतिबंधात्मक आदेश से पहले पत्रकारों को विश्वास में लिया जाएगा।
प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ में प्रेस और सरकार के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। जहां कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों पर मीडिया के लिए कुछ दिशानिर्देश जरूरी हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर पत्रकारों का कहना है कि पारदर्शिता और सूचना तक पहुंच में किसी तरह की बंदिश अस्वीकार्य है।
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