प्राकृतिक आपदाओं से निपटने बाढ़ बचाव परिदृश्य पर मॉक अभ्यास सम्पन्न,मंत्री नेताम ने लिया जायजा

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने बाढ़ बचाव परिदृश्य पर मॉक अभ्यास सम्पन्न,तातापानी पर्यटन स्थल एवं सकेतवा जलाशय में हुआ सजीव प्रदर्शन, मंत्री नेताम ने लिया जायजा
प्राकृतिक आपदाओं तथा विशेषकर बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियों को परखने और विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आज जिले में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास तातापानी पर्यटन स्थल एवं सकेतवा जलाशय परिसर में सम्पन्न हुआ।

मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
मॉक ड्रिल कार्यक्रम में आदिम जाति विकास, पशुपालन एवं कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बाढ़ परिदृश्य की काल्पनिक स्थिति
अभ्यास की शुरुआत एक काल्पनिक स्थिति से की गई, जिसमें यह दर्शाया गया कि भारी वर्षा के कारण सकेतवा जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है और आसपास के गांवों में पानी प्रवेश कर रहा है। इस परिदृश्य में प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों की रूपरेखा लागू की।
मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जानकारी दी गई।
रेस्क्यू दल नाव और लाइफ जैकेट की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर लाने के लिए उतरा।
प्रभावित लोगों को क्रमवार सुरक्षित स्थान तक ले जाया गया और अस्थायी राहत शिविर में पहुँचाया गया।
राहत और बचाव सेवाओं का प्रदर्शन
मॉक अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों ने अपनी-अपनी भूमिका का सजीव प्रदर्शन किया—
स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर और एंबुलेंस सेवाएँ प्रदर्शित कीं।
आपदा प्रबंधन दल और SDRF ने जलाशय में उतरकर गोताखोरों के माध्यम से फंसे लोगों को बचाने की कार्यवाही की।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रक्रिया दिखाई।
खाद्य एवं राहत दल द्वारा भोजन वितरण और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बताई गई।
शिविरों में दवाइयाँ, उपचार, जांच और रेफर प्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया।

मंत्री नेताम का संबोधन
मंत्री रामविचार नेताम ने मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभ्यास का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों एवं दलों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा—
“बाढ़ जैसी आपदा कभी भी अचानक आ सकती है। ऐसी स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई ही जन-जीवन को सुरक्षित रख सकती है। यह आवश्यक है कि सभी विभाग पहले से तैयार रहें और आपसी समन्वय बनाए रखें।”
उन्होंने यह भी कहा कि मॉक ड्रिल के माध्यम से भीड़ नियंत्रण, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने, राहत शिविरों की व्यवस्था और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का अभ्यास कर वास्तविक स्थिति से निपटने की क्षमता मजबूत होती है।
प्रशासनिक सजगता और जनभागीदारी का संदेश
इस अभ्यास ने यह संदेश दिया कि किसी भी आपदा की घड़ी में प्रशासनिक सजगता, विभागीय समन्वय और जनभागीदारी से ही चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। तातापानी और सकेतवा जलाशय में हुआ यह मॉक ड्रिल जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता की सजीव झलक थी, जिसमें जनता ने भी राहत और प्राथमिक उपचार प्रक्रियाओं को नजदीक से समझा।





