वाड्रफनगर में शक्ति प्रदर्शन: विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के समर्थन में उमड़ा आदिवासी समाज, हजारों की रैली ने बदली राजनीतिक हवा

बलरामपुर।
प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों जाति प्रमाण पत्र विवाद सुर्खियों में है। इसी मुद्दे पर मंगलवार को वाड्रफनगर में एक अभूतपूर्व नज़ारा देखने को मिला, जब सर्वआदिवासी समाज ने विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के समर्थन में भारी भीड़ के साथ विशाल रैली निकाली। शहर की सड़कें सुबह से ही जनसमूह के कारण ठहर-सी गईं, और पूरा इलाका एकजुटता के नारों से गूंज उठा।
हजारों की भीड़, सड़कों पर नारे और समर्थन का माहौल
रैली में दूर-दराज़ के गांवों से लोग पहुंचे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, युवा ढोल-नगाड़ों के साथ, बुजुर्ग तीर-धनुष और परंपरागत प्रतीकों के साथ शामिल हुए।
सड़कों पर लगातार एक ही आवाज़ गूंजती रही—
“विधायक शकुंतला तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
लोग हाथों में “हमारी बेटी, हमारा सम्मान” जैसे पोस्टर लिए आगे बढ़ते रहे। माहौल पूरी तरह विधायक के समर्थन में खड़ा दिखा।

आदिवासी नेताओं का बयान: “मामला न्यायालय में, आरोप राजनीतिक”
मंच से समाज के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी प्रकार का आरोप, विरोध या दुष्प्रचार अनुचित और गैरकानूनी मानसिकता का परिचायक है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि—कुछ राजनीतिक विरोधी और कुछ प्रभावशाली लोग इस विवाद का इस्तेमाल विधायक की छवि खराब करने के लिए कर रहे हैं।
समाज के नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अब पहले जैसा नहीं रहा—“जागरूक है, संगठित है और अपने जनप्रतिनिधि के सम्मान के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है।”
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
रैली में सबसे बड़ी भागीदारी महिलाओं और युवाओं की थी।
महिलाओं ने कहा कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते “समाज की बेटी हैं” और उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
स्थानीय सूत्रों के दावे और राजनीतिक हलचल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस पूरे विवाद के पीछे कुछ क्षेत्रीय विरोधी और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका बताई जा रही है। उनका दावा है कि जाति प्रमाण पत्र को बहाना बनाकर विधायक को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विकास कार्यों का भी हुआ उल्लेख
समाज के पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते अपने क्षेत्र में लगातार विकास कार्य कर रही हैं।
उनका कहना है कि—सड़क निर्माण,पेयजल परियोजनाएँ , शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्य तेज़ी से जारी हैं, जिसे विपक्ष पचा नहीं पा रहा है।
इसी कारण, समाज का मानना है कि अनर्गल आरोपों के ज़रिए उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
रैली क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
वाड्रफनगर में निकली यह रैली कई मायनों में अहम मानी जा रही है—
1. भीड़ का आकार—पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी समाज एक मुद्दे पर सामने आया।
2. राजनीतिक संदेश—यह स्पष्ट संकेत कि समाज अपने प्रतिनिधि के समर्थन में सड़कों पर उतरने को तैयार है।
3. आने वाले चुनावों पर असर—विश्लेषकों का मानना है कि यह शक्ति प्रदर्शन स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
रैली ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अदालत में विचाराधीन मुद्दे पर किसी भी तरह का दुष्प्रचार स्वीकार नहीं होगा और समाज अपने प्रतिनिधि के साथ खड़ा है।
अब नज़रें इस बात पर टिक गई हैं कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।



