LKG छात्र ने होमवर्क नहीं किया तो पेड़ पर लटका दिया, निजी स्कूल

मासूम बच्चा पेड़ पर लटकाया गया निजी स्कूल में अमानवीय सजा, प्रशासन और अभिभावक स्कूल प्रबंधन पर भड़के
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में हंस वाहिनी विद्या मंदिर, नारायणपुर (आमापारा) से जो तस्वीर सामने आई है, उसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। LKG के एक मासूम बच्चे को सिर्फ इसलिए पेड़ पर लटका दिया गया क्योंकि उसने होमवर्क पूरा नहीं किया था। टी शर्ट के सहारे पेड़ पर झूलता बच्चा डर के साथ खुद को संभालने की कोशिश करता दिख रहा है, और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार फैल रहा है।
यह घटना जितनी हैरान करती है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल प्रशासन इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठा है। जिम्मेदार कौन है, किसने यह सजा दी, इस बारे में स्कूल की ओर से कोई आधिकारिक बयान तक नहीं आया। न कोई सफाई, न कोई खंडन। यही चुप्पी सबसे ज्यादा подоз पैदा कर रही है।
देखे वीडियो :-
स्कूल प्रशासन की बड़ी लापरवाही
अभिभावकों का कहना है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि स्कूल प्रबंधन की निगरानी में बड़ी खामी का नतीजा है। इतना बड़ा कदम अकेले किसी शिक्षक द्वारा उठाया जाना मुश्किल है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जहां बच्चे स्कूल की देखरेख में होते हैं, वहां ऐसी क्रूर हरकत कई मिनट तक कैसे चलती रही और किसी ने रोका क्यों नहीं।
कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि स्कूल में अनुशासन के नाम पर पहले भी बच्चों के साथ सख्ती की शिकायतें हुई थीं, लेकिन प्रबंधन ने कभी खुलकर कार्रवाई नहीं की।
अभिभावकों का गुस्सा फूटा
वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। अभिभावक कह रहे हैं कि स्कूल प्रशासन बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता तो स्कूल चलाने का कोई अधिकार नहीं रखता। कई अभिभावकों ने स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की मांग की है।
एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, प्रताड़ना झेलने नहीं। यह घटना गलती नहीं, अपराध है। स्कूल प्रशासन ने इसे होने दिया, इसके लिए वे भी उतने ही दोषी हैं।”
प्रशासन की जांच तेज
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और यदि प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो स्कूल के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया जाएगा।
शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि वीडियो में साफ दिख रहे अमानवीय व्यवहार को किसी भी हाल में शिक्षक-छात्र संबंध के दायरे में नहीं रखा जा सकता।
सवाल स्कूल पर
- स्कूल में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था क्या सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- प्रबंधन को वीडियो सामने आने तक कुछ भी पता क्यों नहीं चला?
- क्या शिक्षक इसी तरह बच्चों को दंड देते रहे और स्कूल ने कभी ध्यान नहीं दिया?
- क्या यह स्कूल प्रणाली में गहरे बैठे असंवेदनशील रवैये का हिस्सा है?
यह घटना सिर्फ एक बच्चे की नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र की चेतावनी है। अगर स्कूल ही बच्चों को सुरक्षा न दें, तो अभिभावक भरोसा किस पर करें।




