कन्हर नदी का एनीकट फिर खतरे में: दस साल में तीसरी बार क्षति, करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरा निर्माण उजागर

रामानुजगंज कन्हर नदी पर लगभग दस वर्ष पहले करीब नौ करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया एनीकट एक बार फिर गंभीर क्षति का शिकार हो गया है। जलस्तर घटने के साथ ही इसकी टूटफूट स्पष्ट दिखाई देने लगी है, जिससे निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यह तीसरी बार है जब इस संरचना को भारी नुकसान पहुंचा है।
अधूरा निर्माण बना कमजोरी की वजह
सूत्रों के अनुसार एनीकट के निर्माण के समय ही डाउनस्ट्रीम फ्लोर के फर्श और दीवार का काम अधूरा छोड़ दिया गया था। यह कमी वर्षों से नजरअंदाज होती रही। हर मानसून में आने वाली बाढ़ का दबाव अधूरे हिस्से पर पड़ता रहा, जिससे एनीकट लगातार कमजोर होता गया। अब बचा हुआ हिस्सा भी बह गया है।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि डाउनस्ट्रीम फ्लोर की अनुपस्थिति किसी भी एनीकट के लिए सीधी संरचनात्मक कमजोरी मानी जाती है। यह वही हिस्सा है जो बाढ़ के झटकों से मुख्य ढांचे को बचाता है। अधूरा छोड़ने का मतलब था कि बाढ़ का पूरा भार सीधे एनीकट पर पड़ता रहे।
परियोजना सालों से विवादों में फंसी
कन्हर एनीकट कोई साधारण परियोजना नहीं थी। इसका उद्देश्य शहर और आसपास के इलाकों के लिए स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित करना था, लेकिन शुरुआत से ही विवादों और आरोपों ने इसे घेरे रखा। विधानसभा में भी यह मामला जोरों से उठा था, जिसके बाद तत्कालीन कार्यपालन अभियंता को निलंबित किया गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में भारी अनियमितताएं हुईं और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बावजूद विभाग ने समय पर सुधार नहीं किए।
मरम्मत पर लाखों खर्च, फिर भी रिसाव जारी
कुछ दिन पहले ही लाखों रुपए खर्च कर एनीकेट की मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन इसका असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है। गेट से लगातार पानी रिस रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों द्वारा कई बार मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए निकाले गए, जबकि संरचना आज भी उसी स्थिति में है।
नगरपालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने कहा कि डाउनस्ट्रीम फ्लोर और दीवार का निर्माण तुरंत कराना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो शहर को भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। अग्रवाल ने जल संसाधन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
लापरवाही ने ली कई जानें
सिर्फ खराब निर्माण ही नहीं, एनीकट की अनदेखी ने अब तक कई लोगों की जानें भी ले ली हैं। सुरक्षा उपायों की कमी और टूटे हिस्सों के कारण कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इससे जिम्मेदार तंत्र की नींद नहीं टूटी।
स्थानीय जनता में गुस्सा, प्रशासन पर सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि एनीकट कोई साधारण संरचना नहीं, बल्कि शहर की जीवनरेखा है। फिर भी उसकी मरम्मत और रखरखाव को गंभीरता से नहीं लिया गया। कई नागरिकों ने कहा कि हर बार बारिश के मौसम में नुकसान सामने आता है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही सिमट जाती है।
आगे क्या?
फिलहाल एनीकट की वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस मरम्मत नहीं हुई तो यह संरचना भविष्य में पूरी तरह बेकार हो सकती है। इससे न केवल जलापूर्ति प्रभावित होगी बल्कि आसपास के लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ेगा।




