महिला शिक्षिकाओं का जोरदार प्रदर्शन, अधिकारी को घेरकर रखीं सात बड़ी मांगें, विभागीय लापरवाही के खिलाफ फूटा आक्रोश

महिलाओं ने अधिकारी को घेरकर जताया तीखा विरोध, भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ गरजी आवाजें
बलरामपुर जिले के विकासखंड रामचंद्रपुर में बुधवार र का दिन शिक्षा विभाग के लिए भारी पड़ गया। लंबे समय से विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार से परेशान महिला शिक्षिकाएं आज बड़ी संख्या में ब्लॉक कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने पहले कार्यालय का घेराव किया और इसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी को बीच में घेरकर अपनी शिकायतें सीधे और कड़े शब्दों में रखीं। माहौल तनावपूर्ण भी हुआ लेकिन शिक्षिकाएं अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं थीं।
शिक्षिकाओं ने कहा कि विभाग में वर्षों से कई कार्य अटके हुए हैं। एरियर भुगतान, सेवा पुस्तिका अद्यतन, पदोन्नति लाभ, विभागीय अनुमति और कर्मचारियों के व्यवहार जैसे मुद्दों पर बार बार शिकायतों के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। महिलाओं ने बताया कि कई बाबू पदोन्नति के बाद भी वेतन लाभ रोक कर रखते हैं और फाइल आगे बढ़ाने में जानबूझकर देरी करते हैं। कई बार कर्मचारी अभद्र भाषा में बात करते हैं। आरोप यह तक लगा कि कार्यालय का चपरासी भी तू तड़ाक से जवाब देता है।
शिक्षिकाओं ने अधिकारी के सामने सात प्रमुख मांगें रखीं और कहा कि इन बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई न हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।


पहली मांग
पदोन्नत सभी शिक्षकों का एरियर तत्काल भुगतान किया जाए। महिलाओं ने बताया कि डेढ़ साल से एरियर का काम चल रहा है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षकों को उनका पैसा नहीं मिला है। समान पद पर समान नियुक्ति तिथि होने के बावजूद राशि में भारी अंतर है।
दूसरी मांग
संकुल स्तर पर शिविर आयोजित कर सभी शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं अद्यतन की जाएं। कई की सर्विस बुक वर्षों से अपडेट नहीं है जिससे वेतन, पदोन्नति और अन्य लाभ प्रभावित होते हैं। द्वितीय प्रति के संधारण की भी मांग की गई।
तीसरी मांग
लंबित परीक्षाओं के लिए विभागीय अनुमति और कार्ययोत्तर अनुमति जल्द जारी हो। शिक्षिकाओं के अनुसार कई शिक्षकों के भविष्य की दिशा केवल इस वजह से रुकी है कि अनुमति समय पर नहीं दी जाती।
चौथी मांग
पदोन्नति, पदस्थापना और कार्यभार ग्रहण में एकरूपता लाई जाए और एरियर में हो रहे अंतर की जांच कर कार्रवाई हो। महिलाओं ने कहा कि एरियर को हर बार टुकड़ों में बांटकर चुकाने की पुरानी प्रक्रिया बंद हो और इसे एक साथ भुगतान किया जाए ताकि लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
पांचवीं मांग
लंबे समय से एक ही विभाग संभाल रहे कर्मचारियों का DPI के आदेश के अनुसार विभाग परिवर्तन किया जाए। महिलाओं का कहना है कि वर्षों से जमे कुछ कर्मचारी ही अनियमितता और भ्रष्टाचार की जड़ बने हुए हैं।
छठी मांग
पदोन्नति के बाद प्रधानपाठकों को शत प्रतिशत प्रधानपाठक वेतन तुरंत दिया जाए। कई प्रधानपाठक पदभार लेने के महीनों बाद भी पूरा वेतन नहीं पा रहे।
सातवीं मांग
विभागीय डेटा लीक के मामलों की जांच हो। शिक्षिकाओं ने कहा कि मोबाइल नंबर, पता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बाहर जाने लगी है जो गंभीर सुरक्षा समस्या है। (साइबर ठग के द्वारा कुछ दिन पहले ही कुछ शिक्षकों को आर्थिक रूप से काफी नुकसान झेलना पड़ा है)
इन मांगों के साथ शिक्षिकाओं ने अधिकारी को सात दिन की समय सीमा दी। महिलाओं ने कहा कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगी और इसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ से वरिष्ठ शिक्षिका अन्नू रवानी, माया श्रीवास्तव, शिला सुमन, ब्लॉक अध्यक्ष सिम्मी गुप्ता, विभा कश्यप, लोकेश्वरी दिवान, रूपमश्री वर्मन, साधना एक्का, लक्ष्मी ठाकुर, ममता ठाकुर, अंजू रवि, सुनीता गुप्ता, फ्रिस्का बखला, कविता सिंह, माइकेला लकड़ा, सोनिया ओयमा, नीमा गुप्ता, मोनिका टोप्पो सहित सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं। पुरुष शिक्षकों में विद्या सागर यादव, कुंदन दुबे, बीरन सिंह और हेम प्रताप बेक भी विरोध में शामिल हुए।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाहा ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि जल्द जांच और कार्रवाई की जाएगी। हालांकि शिक्षिकाओं ने कहा कि इस बार केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उन्हें ठोस परिणाम चाहिए।



