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शासकीय और किसानों की निजी भूमि तक दर्ज कराई गई, राजस्व स्टाफ पर मिलीभगत का आरोप

बलरामपुर जिले में बड़ा राजस्व घोटाला: छह गांवों की शासकीय और निजी भूमि एक ही परिवार के नाम, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की सामूहिक शिकायत

बलरामपुर जिले के राजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में भूमि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार, पटवारी और बिचौलियों की मिलीभगत से कोदौरा, कोटडीह, भेंडरी, परसवार खुर्द, करमडीहा और पकराडी गांवों की लगभग 60 से 70 एकड़ से अधिक भूमि एक ही परिवार के नाम दर्ज कर दी गई।

ग्रामीणों के अनुसार ये भूमि न सिर्फ निजी भू-स्वामियों की पुश्तैनी जमीन है, बल्कि इन गांवों में स्थित शासकीय भूमि, जिसका रकबा लगभग 10 हेक्टेयर से अधिक बताया जा रहा है, उसे भी रिकॉर्ड में बदलकर एक परिवार के नाम कर दिया गया।

एक ही परिवार के नाम दर्ज हुई जमीन

आरोपों के अनुसार जिन लोगों के नाम पर यह बड़ी मात्रा में भूमि दर्ज की गई है, वे हैं—

  • विरेन्द्र गुप्ता
  • नरेन्द्र गुप्ता
  • धर्मेन्द्र गुप्ता
  • प्रिता विजय गुप्ता
  • प्रियंका गुप्ता
  • सरिता देवी
  • बिंद्रा देवी

ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार ग्राम कोदौरा में रहते हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद रिकॉर्ड में कई गांवों की जमीन एक साथ इनके नाम चढ़ा दी गई।

किसानों को धान पंजीयन के समय हुई जानकारी

बड़ी गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब किसान धान पंजीयन के लिए अपने ऑनलाइन दस्तावेज निकालने पहुंचे। कई किसानों की खसरा और भूमि रिकॉर्ड में उनके नाम की जगह गुप्ता परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज मिले।
किसानों ने कहा कि यह परिवर्तन उनकी जानकारी या अनुमति के बिना किया गया और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज होने के कारण उन्हें तुरंत समझ आ गया कि बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है।

सात दिन तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

ग्रामीणों ने तत्काल पटवारी और तहसीलदार को आवेदन देकर मामले की जानकारी दी थी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सात दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, न ही रिकॉर्ड में सुधार हुआ और न ही कोई जांच शुरू की गई।

इसके बाद ग्रामीणों का धैर्य टूट गया और वे सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विस्तृत जानकारी के साथ लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप: रिकॉर्ड में इतनी बड़ी छेड़छाड़ बिना मिलीभगत के संभव नहीं

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि

  • शासकीय भूमि
  • किसानों की निजी खेती-बाड़ी
  • कई गांवों की पट्टे वाली जमीन

सब कुछ बिना अनुमति और जांच के एक परिवार के नाम दर्ज कर दिया गया।
उनका कहना है कि इतनी भारी मात्रा में भूमि का हस्तांतरण राजस्व विभाग के लॉगिन आईडी और पासवर्ड के बिना संभव ही नहीं, इसलिए इसमें विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत साफ दिखाई देती है।

कुछ किसानों ने यह भी कहा कि कई गांवों में लगभग पूरे गांव की जमीन एक ही परिवार के नाम ऑनलाइन दिख रही है, जो रिकॉर्ड प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।

पहले भी हुआ था ऐसा बड़ा घोटाला

ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले रामचंद्रपुर तहसील में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में बिचौलियों ने वनभूमि तक अपने नाम पर करा ली थी और धान बेचने की तैयारी में थे।
उस समय तत्कालीन कलेक्टर ने कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित तहसीलदार को निलंबित किया था और करोड़ों रुपए की हेराफेरी उजागर हुई थी।

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अब जिला प्रशासन के कदमों पर निगाहें

ग्रामीणों ने मांग की है कि—

  • भूमि रिकॉर्ड की पूरी जांच कराई जाए
  • रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो
  • आरोपी परिवार और बिचौलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए
  • किसानों की मूल भूमि तत्काल उनके नाम पर बहाल की जाए

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर किस स्तर की कार्रवाई करता है और क्या इस घोटाले में शामिल लोगों तक कानूनी कार्रवाई पहुंच पाती है।

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