
बलरामपुर जिले के राजपुर–प्रतापपुर मार्ग, जो दो जिलों और दो विधानसभाओं को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है, इन दिनों अपनी खराब हालत को लेकर चर्चा में है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन बन रहा यह मार्ग अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। कई हिस्सों में डामर उखड़ गया है और सतह टूटने लगी है। इससे आम लोगों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण अधूरा, फिर भी सड़क टूटने लगी

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का डामर पहली ही बारिश में बह जाता है और कई हिस्सों पर परतें उखड़ चुकी हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण की गति धीमी है और जहां काम हुआ है, वहां भी गुणवत्ता नजर नहीं आती। सड़क की हालत देखकर यह सवाल उठ रहा है कि अगर यह स्थिति निर्माणाधीन चरण में ही है, तो इसके पूरा होने के बाद इसका जीवनकाल कितना होगा।
घटिया सामग्री और तकनीकी लापरवाही के आरोप
क्षेत्र में लगातार यह आरोप चर्चा में हैं कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में बेस लेयर और बिटुमिन की सही मात्रा का पालन नहीं किया गया। कई ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रोलर चलाने और सतह को मजबूत करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का भी ठीक से पालन नहीं किया गया।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं और कमीशन आधारित काम की वजह से गुणवत्ता प्रभावित हुई। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में असंतोष जरूर बढ़ रहा है।
अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी हालात जस के तस

मामले में सबसे चिंता की बात यह है कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और निर्देश देने के बाद भी सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिकायतें देने के बावजूद न तो मरम्मत हुई और न ही निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की गई।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि विभागीय निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है और PWD अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पालन किस स्तर पर कर रहे हैं।
जनता की सुरक्षा और संसाधनों पर सवाल

सड़क की खराब स्थिति से आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। बाइक सवारों को खास तौर पर परेशानी हो रही है। कई वाहन चालक बताते हैं कि गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है। साथ ही, करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजना में इस तरह की लापरवाही सरकारी संसाधनों के सही उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाती है।
स्थानीय मांग: निर्माण की जांच हो, सड़क की गुणवत्ता सुधारी जाए
क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई और ठोस मरम्मत कार्य जल्द शुरू किया जाए, ताकि आने-जाने वाले लोगों को राहत मिल सके।
राजपुर–प्रतापपुर मार्ग की वर्तमान स्थिति से साफ है कि यह मामला अब केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता का भी मुद्दा बन गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि विभाग जल्द कदम उठाकर सड़क को सुरक्षित और उपयोगी बनाएगा।
नोट:इस मामले में पीडब्ल्यूडी के एसडीओ और इंजीनियर से फोन के माध्यम से संपर्क किया गया लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन तक उठाने की जरूरत नहीं समझी जिस कारण से पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का पक्ष नहीं रखा गया है



