मंदिर दर्शन से गांव दौरे तक, बृहस्पति सिंह की सक्रियता ने बढ़ाई राजनीतिक सियासी सरगर्मी

रामानुजगंज की राजनीति में नई हलचल, पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह की सक्रियता से बदले सियासी संकेत
रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की रामानुजगंज विधानसभा एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बनती नजर आ रही है। कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने लंबे समय के बाद क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है। लगातार हो रहे गांव दौरे, कार्यकर्ताओं से मुलाकात और धार्मिक स्थलों पर उपस्थिति को स्थानीय राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों में बृहस्पति सिंह बलरामपुर जिले के कई गांवों में पहुंचे। उन्होंने आम लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। उनके साथ पुराने समर्थक और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता भी नजर आए, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सर्किट हाउस की मुलाकात से बढ़ी अटकलें
हाल ही में बृहस्पति सिंह ने बलरामपुर सर्किट हाउस में कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी। यह मुलाकात औपचारिक थी या किसी नई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा, इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इस पर न तो बृहस्पति सिंह और न ही कांग्रेस संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्र की राजनीति को जरूर गर्म कर दिया है।
विवादों से जुड़ा रहा राजनीतिक सफर
रामानुजगंज विधानसभा से पूर्व विधायक रहे बृहस्पति सिंह का राजनीतिक जीवन हमेशा चर्चा और विवादों में रहा है। दिसंबर 2023 में कांग्रेस के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी के चलते पार्टी नेतृत्व ने उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्होंने पार्टी संगठन और शीर्ष नेतृत्व पर खुलकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने एआईसीसी से तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा को हटाने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने टीएस सिंहदेव को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की थी। बृहस्पति सिंह का कहना था कि यदि टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होते, तो कांग्रेस को 14 सीटें भी नहीं मिल पातीं। उन्होंने यहां तक कहा था कि भाजपा को टीएस सिंहदेव को राज्यपाल बना देना चाहिए। इन बयानों के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

जनसंपर्क के जरिए जमीन मजबूत करने की कोशिश
निष्कासन के बाद लंबे समय तक राजनीतिक रूप से शांत रहे बृहस्पति सिंह अब फिर से सक्रिय नजर आ रहे हैं। सोमवार को वे रामानुजगंज स्थित मां महामाया मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचे और लोगों से सीधे संवाद किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बृहस्पति सिंह पुराने जनाधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वे विकास कार्यों, आदिवासी मुद्दों और क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे उनके समर्थकों में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।
2028 विधानसभा चुनाव पर टिकी नजर
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बृहस्पति सिंह की मौजूदा सक्रियता का सीधा संबंध 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से है। माना जा रहा है कि वे रामानुजगंज सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि इस बारे में उन्होंने अभी तक कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके कदम आने वाले चुनाव की तैयारी की ओर इशारा कर रहे हैं।यदि बृहस्पति सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो इससे रामानुजगंज की राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। इसका असर न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि भाजपा की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
आने वाले समय में और तेज होगी राजनीति
फिलहाल बृहस्पति सिंह की बढ़ती सक्रियता ने रामानुजगंज विधानसभा की राजनीति को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यदि वे अपनी राजनीतिक मंशा साफ करते हैं, तो क्षेत्र में सियासी हलचल और तेज हो सकती है। स्थानीय जनता और राजनीतिक दलों की नजर अब उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।



