बलरामपुर में अवैध बॉक्साइट खनन पर बवाल, मारपीट के बाद ग्रामीण की मौत; उच्च स्तरीय जांच की मांग

बलरामपुर में अवैध बॉक्साइट खनन, मारपीट और ग्रामीण की मौत से मचा बवाल,उच्च स्तरीय जांच की मांग, कई अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के थाना कोरंधा क्षेत्र में अवैध बॉक्साइट खनन, ग्रामीणों से कथित मारपीट और एक व्यक्ति की मौत का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। 15 फरवरी 2026 की रात हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने पुलिस व राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। प्रकरण क्रमांक 03/2026 के तहत मामला दर्ज है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधूरी है और कई प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र में महीनों से चल रहा था अवैध खनन
शिकायत के अनुसार, छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा से लगे घुनसा डोंगीपानी जंगल क्षेत्र में कई महीनों से अवैध रूप से बॉक्साइट का उत्खनन किया जा रहा था। बताया गया है कि जेसीबी मशीनों की मदद से खनन कर ट्रकों के जरिए खनिज को झारखंड भेजा जा रहा था।

इस कथित अवैध कारोबार में झारखंड के डाल्टेनगंज निवासी राहुल जायसवाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर मुंशी और दलालों के माध्यम से खनन और परिवहन की व्यवस्था किए जाने के आरोप हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि प्रति ट्रक एक लाख रुपये की कथित अवैध राशि तय कर सैकड़ों ट्रिप कराए गए, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति हुई।

15 फरवरी की रात क्या हुआ
घटना 15 फरवरी 2026 की रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। आरोप है कि अवैध खनन की जांच के नाम पर राजस्व और पुलिस विभाग की टीम ग्राम हंसपुर नवाटोली पहुंची। टीम में राजस्व अधिकारी, तहसील स्तर के कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और अन्य लोग शामिल थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान गांव के कुछ लोगों के साथ मारपीट की गई। रामनरेश, अजीत राम और आकाश अगेरिया के साथ कथित रूप से गंभीर मारपीट हुई। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान रामनरेश बेहोश हो गए।
उन्हें रात करीब 10:30 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
गिरफ्तारियां हुईं, पर कई नाम जांच से बाहर?
पुलिस ने 16 फरवरी को चार आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। इन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2), 3(5) के तहत मामला दर्ज है। हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत में जिन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनमें राजस्व विभाग के अधिकारी, तहसील स्तर के कर्मचारी, वाहन चालक, सुरक्षा कर्मी, ट्रक चालक और अवैध खनन से जुड़े अन्य नाम शामिल हैं। आरोप है कि घटना में शामिल कुछ वाहन जब्त नहीं किए गए और ट्रक चालक को कथित रूप से छोड़ दिया गया।
थाना प्रभारी और अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप

शिकायत में थाना कोरंधा के तत्कालीन प्रभारी और कुछ राजस्व अधिकारियों पर भी अवैध खनन को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि सीमावर्ती क्षेत्र से बॉक्साइट की निकासी लंबे समय से हो रही थी और इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को थी।
यह भी आरोप है कि यदि उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पूरे मामले में मिलीभगत की परतें सामने नहीं आ पाएंगी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग

मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज और पुलिस अधीक्षक बलरामपुर को ज्ञापन सौंपा गया है। मांग की गई है कि एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की जाए, ताकि घटना में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
प्रशासन का रुख
पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने फिलहाल आरोपों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।
बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक ग्रामीण की मौत तक सीमित नहीं है। यह अवैध खनन, प्रशासनिक जवाबदेही और सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व क्षति के साथ-साथ कानून के दुरुपयोग का भी मामला बन सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि जांच कितनी पारदर्शी और निष्पक्ष होती है, और क्या सभी जिम्मेदार लोगों तक कानून का हाथ पहुंच पाता है या नहीं।




