गैस सिलेंडर छापेमारी के दौरान बढ़ा विवाद,राहुल से कथित अभद्रता; वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

गैस सिलेंडर छापेमारी के दौरान बढ़ा विवाद, राहुल से कथित अभद्रता; वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस कनेक्शन के दुरुपयोग को रोकने के लिए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग द्वारा लगातार छापेमार कार्रवाई की जा रही है। छोटे ठेला-टपरी, चाय-नाश्ते की दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग को लेकर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इसी कार्रवाई के दौरान अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामला बुधवार शाम करीब 6 बजे का बताया जा रहा है, जब फूड इंस्पेक्टर पुलिस कर्मचारियों के साथ 12वीं बटालियन के सामने स्थित एक छोटी चाय-नाश्ते की टपरी पर छापेमारी करने पहुंचीं। इस दौरान दुकान में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग को लेकर कार्रवाई की जा रही थी।
इसी दौरान मौके पर मौजूद स्वतंत्र पत्रकार और पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके युवा राहुल जीत सिंह ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। राहुल का कहना था कि प्रशासन छोटे दुकानदारों पर तो लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन जहां बड़े स्तर पर गैस की कालाबाजारी हो रही है, वहां छापेमारी क्यों नहीं की जाती।
राहुल जीत सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने फूड इंस्पेक्टर से इस संबंध में सवाल पूछा तो उन्होंने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस बात को लेकर मौके पर माहौल गर्म हो गया और काफी देर तक बहस होती रही।
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में कथित तौर पर फूड इंस्पेक्टर को कई बार यह कहते हुए सुना जा सकता है—“हाँ तुम हो, “हाँ तुम हो “हाँ तुम लोग हो इस लायक।” राहुल जीत सिंह का आरोप है कि यह टिप्पणी उनके प्रति अपमानजनक थी और इसी वजह से उन्होंने मौके पर ही माफी की मांग की।
बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद राहुल जीत सिंह और उनके साथ मौजूद लोगों ने फूड इंस्पेक्टर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कही। स्थिति को संभालने के लिए बाद में थाना प्रभारी और तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की। हालांकि राहुल अपनी मांग पर अड़े रहे और उन्होंने कहा कि जब तक उनसे अभद्रता के लिए माफी नहीं मांगी जाएगी, तब तक वे इस मामले को उठाते रहेंगे।
इस पूरे मामले के दौरान एक और मुद्दा सामने आया है। राहुल जीत सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि छापेमारी के लिए जिन गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया, उन पर बड़े अधिकारियों के नाम की नेम प्लेट लगी हुई थी। उन्होंने आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या किसी बड़े अधिकारी के नाम से दर्ज वाहन का संचालन कोई अन्य अधिकारी कर सकता है, या यह नियमों का उल्लंघन है।
राहुल का कहना है कि यदि किसी अधिकारी के नाम की नेम प्लेट लगी गाड़ी का उपयोग नियमों के तहत सीमित है, तो फिर फूड इंस्पेक्टर द्वारा ऐसी गाड़ी का इस्तेमाल करना नियमों के साथ खिलवाड़ माना जा सकता है। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगा या फिर कार्रवाई केवल सवाल उठाने वाले व्यक्ति तक ही सीमित रहेगी।
कई लोगों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन गैस के दुरुपयोग पर कार्रवाई कर रहा है तो उसे बड़े स्तर पर होने वाली कालाबाजारी पर भी समान रूप से सख्ती दिखानी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि पुलिस और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या फूड इंस्पेक्टर पर लगे आरोपों की भी जांच कर कार्रवाई की जाती है या नहीं।



