उत्तर प्रदेशकार्यवाहीगरियाबंदचिरमिरीछत्तीसगढ़जसपुरजांजगीर चांपाझारखण्डदिल्लीदेशप्रतापपुरबलरामपुरबलौदा बाजारबस्तरबिलासपुरभरतपुर सोनहतभाजपाभारतमनेन्द्रगढ़महासमुंदमहेंद्रगढ़मुंबईरघुनाथनगरराजनीतिराजपुरराज्यसभारामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायपुररायपुरवीजापुरशंकरगढ़सरगुजासामरीसुरजपुर

रिकॉर्ड फर्जी, गोदाम खाली: त्रिकुंडा केंद्र में बड़ा खेल उजागर,1630 क्विंटल गायब, जिम्मेदारों पर कसेगा शिकंजा

त्रिकुंडा धान उपार्जन केंद्र में 1630 क्विंटल धान की कमी, तीन कर्मचारियों को नोटिस; जांच से मचा हड़कंप


बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के त्रिकुंडा धान उपार्जन केंद्र में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के अनुसार केंद्र में धान के स्टॉक में भारी कमी पाई गई है, जिसे गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।


संयुक्त टीम की जांच में खुलासा
19 अप्रैल 2026 को राजस्व, खाद्य एवं मार्कफेड विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने त्रिकुंडा उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान केंद्र में उपलब्ध धान का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर सामने आया।


रिकॉर्ड और वास्तविकता में बड़ा अंतर
निरीक्षण के दौरान स्टेक क्रमांक 01 में कुल 5421 बारदानों में धान पाया गया। वहीं ऑनलाइन खरीदी रिपोर्ट के अनुसार उसी समय 9498 बारदानों में 4056.83 क्विंटल धान दर्ज था। इस आधार पर 4077 बारदानों में लगभग 1630.80 क्विंटल धान की कमी पाई गई। इतनी बड़ी मात्रा में अंतर ने अधिकारियों को चौंका दिया।


तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज
मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने तत्कालीन खरीदी प्रभारी दीपक यादव, वर्तमान खरीदी प्रभारी रिशु कश्यप तथा उपार्जन केंद्र की ऑपरेटर श्रीमती जीवन्ती तिर्की को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि उनका कृत्य खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान उपार्जन नीति के प्रावधानों के विपरीत है और कार्य के प्रति लापरवाही तथा स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है।


आर्थिक नुकसान की आशंका
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की अनियमितता से शासन को आर्थिक क्षति होने की संभावना है। इसलिए संबंधित कर्मचारियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक अथवा दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।


24 घंटे में जवाब देने के निर्देश
तीनों कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों की होगी।


प्रशासन सख्त, और जांच के आसार
सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसमें व्यापक जांच की संभावना भी जताई जा रही है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो निलंबन, वसूली या अन्य कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


धान खरीदी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि समय पर जांच नहीं होती, तो इतनी बड़ी अनियमितता सामने नहीं आ पाती।
फिलहाल सभी की नजर संबंधित कर्मचारियों के जवाब और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।

                    इस से संबंधित खबर

Related Articles

Back to top button