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रामानुजगंज में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, धान भुगतान और फर्जी केसीसी मामले को लेकर प्रदर्शन

रामानुजगंज में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, धान की बकाया राशि और फर्जी केसीसी मामलों को लेकर बैंक के खिलाफ मोर्चा


रामानुजगंज (बलरामपुर)। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में पीड़ित किसानों एवं किसान समाज के बैनर तले बुधवार को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, अंबिकापुर शाखा रामानुजगंज के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल पर एकत्रित हुए और अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन-प्रशासन तथा बैंक प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।


धरना दे रहे किसानों की मुख्य मांगों में वर्ष 2025-26 के धान विक्रय की बकाया राशि का तत्काल भुगतान तथा किसानों के नाम पर दर्ज कथित फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मामलों का पूर्ण निराकरण शामिल है। किसानों का आरोप है कि कई लोगों के नाम पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऋण दर्ज कर दिए गए, जिससे वे आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। वहीं धान बिक्री की राशि का भुगतान लंबित रहने से किसानों को खेती-किसानी के साथ-साथ पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि फर्जी केसीसी ऋण प्रकरणों ने कई परिवारों को संकट में डाल दिया है। बैंक रिकॉर्ड में ऋण दर्ज होने के कारण प्रभावित किसानों को नई ऋण सुविधाएं लेने, शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने और बैंकिंग कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा निर्दोष किसानों के नाम से दर्ज ऋण तत्काल समाप्त किए जाएं।


99 मामलों की जांच, 29 किसानों के दावे प्रमाणित
धरना प्रदर्शन के बीच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, अंबिकापुर के चीफ सुपरवाइजर पी.के.पी. सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और फर्जी ऋण मामलों की जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि अब तक बैंक के पास 99 किसानों की सूची उपलब्ध है, जिन्होंने अपने नाम पर फर्जी ऋण दर्ज होने की शिकायत की है। इनमें से 29 किसानों के मामलों का सत्यापन हो चुका है और उनके दावे प्रमाणित पाए गए हैं। शेष मामलों की जांच प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के मामले सही पाए जाएंगे, उनके निराकरण और भुगतान की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।


फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
फर्जी ऋण मामलों में बैंक अधिकारियों की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पी.के.पी. सिंह ने बताया कि जांच के दौरान जिन कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़े में शामिल पाए गए कर्मचारियों, जिनमें ऑपरेटर, लोन मैनेजर और अन्य कर्मचारी शामिल हैं, को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अब तक चार से पांच कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा संबंधित कर्मचारियों से राशि की वसूली की प्रक्रिया भी जारी है।


ऑडिट प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने यह सवाल भी उठाया कि जब सहकारी बैंक की नियमित रूप से ऑडिट होती है, तब इतने बड़े पैमाने पर फर्जी ऋण प्रकरण सामने क्यों नहीं आए। इस पर बैंक के चीफ सुपरवाइजर ने स्वीकार किया कि ऑडिट प्रक्रिया के दौरान कहीं न कहीं चूक हुई है।
उन्होंने कहा कि ऑडिट सरकारी स्तर पर नियुक्त अधिकारियों द्वारा की जाती है, लेकिन यह मामला ऑडिट में सामने नहीं आ पाया। उन्होंने माना कि इतनी बड़ी अनियमितता का समय रहते पता नहीं चलना गंभीर विषय है और इसकी भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।


किसानों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने पर बैठे किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से संबंधित विभागों और अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण अब उन्हें अनिश्चितकालीन धरना शुरू करना पड़ा है।
किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की कि धान विक्रय की बकाया राशि का जल्द भुगतान किया जाए, फर्जी केसीसी ऋण मामलों का तत्काल निराकरण किया जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


किसानों की प्रमुख मांगें
वर्ष 2025-26 के धान विक्रय की बकाया राशि का तत्काल भुगतान।
किसानों के नाम पर दर्ज फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मामलों का निराकरण।
दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
प्रभावित किसानों को आर्थिक और प्रशासनिक राहत प्रदान करना।


भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय करना।
फिलहाल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, अंबिकापुर शाखा रामानुजगंज के सामने किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आंदोलन के आगे के स्वरूप और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर क्षेत्रभर की नजरें टिकी हुई हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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