
रामानुजगंज पुलिस ने 250 एकड़ शासकीय भूमि फर्जी दस्तावेजों से बेचने वाले फरार आरोपी को किया गिरफ्तार
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सरकारी भूमि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से बेचने के मामले में रामानुजगंज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी मोहम्मद याकुब को झारखंड के गढ़वा जिले से गिरफ्तार किया है। यह मामला 2015 में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोपी और उसके साथियों ने संगठित गिरोह बनाकर जालसाजी की थी।
मामले का पूरा विवरण
शिकायत और जांच प्रक्रिया:
दिनांक 18 जुलाई 2015 को नायब तहसीलदार कुंजीलाल सिंह ने थाना रामानुजगंज में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले ग्राम इंदरपुर की 250 एकड़ शासकीय भूमि को कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने नाम दर्ज करा लिया और बाद में इस भूमि को कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अवैध रूप से बेच दिया।
इस मामले की जांच अपर आयुक्त राजस्व सरगुजा अंबिकापुर एवं अपर कलेक्टर रामानुजगंज द्वारा की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने जाली दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को बेचा है। इस आधार पर रामानुजगंज पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की।
मुख्य आरोपी लंबे समय से था फरार
इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद याकुब (पिता स्व. मोहम्मद वली, उम्र 50 वर्ष, निवासी बड़ी जामा मस्जिद गली, गढ़वा, झारखंड) घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रहा था।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
रामानुजगंज पुलिस को विश्वस्त मुखबिर से सूचना मिली कि मोहम्मद याकुब अपने घर गढ़वा आया हुआ है। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने गढ़वा, झारखंड में दबिश दी और आरोपी को हिरासत में लिया।
पूछताछ में आरोपी ने कबूला अपराध
पुलिस हिरासत में लेने के बाद रामानुजगंज थाना लाकर विस्तृत पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी मोहम्मद याकुब ने स्वीकार किया कि उसने व्यास मुनी यादव, लालजी यादव और अन्य साथियों के साथ मिलकर संगठित गिरोह बनाया था। इस गिरोह ने सरकारी जमीन का 1996-97 के राजस्व अभिलेखों में हेरफेर करके फर्जी दस्तावेज तैयार किए और खुद को भूमि स्वामी दिखाकर इसे कोल माइनिंग कंपनी को बेच दिया।
इस मामले में पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य और सबूत इकट्ठा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने अपराध को अंजाम दिया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में शामिल पुलिस अधिकारी और टीम
इस सफलता में रामानुजगंज पुलिस की विशेष टीम का अहम योगदान रहा, जिसमें शामिल थे—
- निरीक्षक रमाकांत तिवारी (थाना प्रभारी, रामानुजगंज)
- उप निरीक्षक गजपति मिंरें
- सहायक उप निरीक्षक अश्वनी सिंह
- प्रधान आरक्षक मायापति सिंह
- प्रधान आरक्षक नारायण तिवारी
- आरक्षक नागेश्वर
- आरक्षक जगमोहन तिर्की
इन सभी पुलिसकर्मियों की सूझबूझ और मेहनत से यह सफलता मिली और लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर कानून के हवाले किया गया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक बलरामपुर-रामानुजगंज वैभव बैंकर के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) याकुब मेमन ने लगातार समीक्षा की और दिशा-निर्देश दिए।
रामानुजगंज पुलिस ने इस मामले में निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए प्रभावी कार्यवाही की और आरोपी को गिरफ्तार किया।
यह मामला सरकारी संपत्ति की जालसाजी और संगठित अपराध से जुड़ा हुआ था, जिसमें आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि का अवैध विक्रय किया। पुलिस की सक्रियता से इस संगठित अपराध में शामिल मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे मामले में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया।



