धान खरीदी में भ्रष्टाचार का आरोप, त्रिकुंडा खरीदी प्रभारी पर मेहरबान प्रशासन

रामचंद्रपुर में धान खरीदी एक बार फिर सवालों के घेरे में, चिरकुंडा केंद्र का मामला बना बड़ा विवाद
बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर क्षेत्र में धान खरीदी हमेशा से विवादों और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही है। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। धान खरीदी को लेकर सामने आए दो मामलों ने प्रशासन, बैंक अधिकारियों और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रामचंद्रपुर विकासखंड के त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र से जुड़ा मामला अब जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच पूरी, फिर भी कार्रवाई शून्य
जानकारी के अनुसार त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र में खरीदी प्रभारी पर किसानों से अवैध वसूली, धान तौल में गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे थे। इन शिकायतों को लेकर जिला स्तर पर जांच समिति गठित की गई थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंप दी है।
इतना ही नहीं, इस मामले में जांच अधिकारी द्वारा रामानुजगंज शाखा प्रबंधक को पत्र जारी कर अपराध पंजीबद्ध करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
शाखा प्रबंधक जांच अधिकारी की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शाखा प्रबंधक यादव द्वारा अपराध दर्ज नहीं कराया गया है। इसे लेकर किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि शाखा प्रबंधक किसी राजनीतिक दबाव, या प्रभावशाली लोगों के प्रभाव में आकर मामले को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन कार्रवाई में हो रही देरी संदेह जरूर पैदा कर रही है।


हटाने के आदेश, लेकिन केंद्र पर मौजूद
प्रशासन की ओर से यह दावा किया गया है कि चिरकुंडा धान खरीदी प्रभारी को औपचारिक रूप से खरीदी कार्य से हटा दिया गया है। लेकिन किसानों का आरोप है कि वह आज भी धान खरीदी केंद्र पर पहुंचकर कामकाज में दखल दे रहा है।
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रभावशाली लोगों के सामने सिस्टम कितना कमजोर नजर आ रहा है।

















जीरो करप्शन के दावों पर सवाल
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अब दो साल पूरे हो चुके हैं। सरकार लगातार जीरो करप्शन और पारदर्शी व्यवस्था की बात करती रही है। धान खरीदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पहले ही वर्ष में कई मामलों में नेताओं के नजदीकी लोगों के जेल जाने की घटनाएं सामने आई थीं।
इसके बावजूद त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना सरकार के दावों पर सवाल खड़े करता है। किसान पूछ रहे हैं कि यदि सरकार सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है, तो फिर ऐसे मामलों में देरी क्यों हो रही है।
कृषि मंत्री के जिले में हालात
यह पूरा मामला इसलिए भी ज्यादा अहम हो जाता है क्योंकि बलरामपुर जिला प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम का गृह जिला है। किसानों और आम लोगों में यह चर्चा है कि यदि मंत्री स्तर पर सख्ती होती, तो किसानों से अवैध उगाही और भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे लोगों पर अब तक कार्रवाई हो चुकी होती।
लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिले में या तो अधिकारियों पर किसी और का दबाव है, या फिर किसानों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
किसानों में आक्रोश
धान खरीदी में गड़बड़ियों से पहले ही किसान परेशान हैं। ऊपर से कार्रवाई में हो रही देरी ने उनके आक्रोश को और बढ़ा दिया है। किसानों का कहना है कि हर साल वही कहानी दोहराई जाती है—जांच होती है, पत्राचार होता है, लेकिन अंत में दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती।
जांच अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन में पाया की धान खरीदी प्रभारी के द्वारा अनियमितता किया गया लेकिन उनके द्वारा FIR करने से बचाते रहे हैं रामानुजगंज शाखा प्रबंधक को जिमा सोप कर पल्ला झाड़ दिया जो कई सवालों को खड़ा करता?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और सरकार इस मामले में कब तक चुप्पी साधे रहते हैं। यदि जल्द ही अपराध दर्ज कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।



