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एरियर्स भुगतान को लेकर शिक्षकों का सब्र टूटा, आंदोलन की चेतावनी


शिक्षकों के सब्र का बांध टूटने के कगार पर, एरियर्स भुगतान को लेकर उग्र आंदोलन की चेतावनी


विकासखंड रामचंद्रपुर का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शिक्षकों की बढ़ती नाराज़गी को लेकर चर्चा में है। बीते दो वर्षों से अधिक समय से लंबित एरियर्स भुगतान ने सैकड़ों शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। पदोन्नत प्रधानपाठक शिक्षक, एलबी संवर्ग के शिक्षक एवं नवीन बहाली के सहायक शिक्षक, जिनका वेतन एरियर्स के रूप में देय है, लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।


शिक्षकों का कहना है कि कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराने के बावजूद आज तक एरियर्स भुगतान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के चलते शिक्षक संघ ने इसे अंतिम चेतावनी मानते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 21 जनवरी 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन एवं कार्यालय घेराव किया जाएगा।


संघ ने कार्यालय में संलग्न बाबू को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षकों का कहना है कि राज्य स्तर से उक्त बाबू को हटाने अथवा संलग्नता समाप्त करने के स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं, इसके बावजूद वह अब भी कार्यालय में कार्यरत है। संघ का दावा है कि एरियर्स भुगतान से संबंधित सभी फाइलें जानबूझकर लंबित रखी जा रही हैं और इसी कारण शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। संघ ने इस बाबू को संपूर्ण समस्या की जड़ बताया है।
शिक्षक संघ ने यह भी बताया कि इससे पूर्व कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, ठोस परिणाम नहीं। संघ का कहना है कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है और यदि इस बार भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। इनमें प्रमुख रूप से प्रदीप चौबे, राज वैभव सिंह, संजय यादव, नंद गुप्ता, सिम्मी गुप्ता, विभा कश्यप, नीमा गुप्ता, ममता ठाकुर, माइकेला लकड़ा, साधना एक्का, ममता मिंज, माधुरी साहू, कमल नयनी, सोनिया ओयमा सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल थे।
शिक्षकों ने एक स्वर में मांग की कि एरियर्स भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए और कार्यालयी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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