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118.80 करोड़ रुपये का आवंटन: जिलों में राशि का वितरण और उपयोग पर संदेह

विधायक निधि से जुड़े निर्माण कार्यों में घोटाले का पर्दाफाश: आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सिन्हा का आरोप

छत्तीसगढ़ में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायक निधि से किए गए निर्माण कार्यों को लेकर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सिन्हा ने आरोप लगाया है कि पिछले 15 वर्षों में विधायक निधि से हुए निर्माण कार्यों की जानकारी को जानबूझकर छिपाया जा रहा है। अधिकारियों और ठेकेदारों से इन कार्यों से जुड़ी जानकारी मांगने पर स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया गया।

विधायक निधि का उद्देश्य और प्रावधान

विधायक निधि का उद्देश्य विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस निधि से विधायक अपने क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण, सामुदायिक शौचालय, पानी की सुविधा, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाओं को लागू कर सकते हैं।
हर विधायक को प्रति वर्ष करोड़ों रुपये दिए जाते हैं, जिसे दो समान किस्तों में जारी किया जाता है। यह निधि जनता की तात्कालिक मांग और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

आरोप: जानकारी देने से इनकार

आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में पिछले 15 वर्षों में विधायक निधि से हुए निर्माण कार्यों का लेखा-जोखा मांगा गया था। लेकिन संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने इस जानकारी को साझा करने से साफ इनकार कर दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सिन्हा का कहना है कि यह पारदर्शिता की भारी कमी को दर्शाता है और इससे अंदेशा होता है कि निधि के उपयोग में व्यापक स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है।

छत्तीसगढ़ में विधायक निधि का आवंटन और उपयोग

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने 118.80 करोड़ रुपये विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के तहत आवंटित किए। यह राशि मार्च 2024 तक उपयोग करने के निर्देश के साथ जारी की गई थी।
सरकार द्वारा 20 दिसंबर 2023 को जारी सूचना में बताया गया था कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में इस राशि का आवंटन किया गया है।

जिलों में राशि का वितरण:

कोरिया, सरगुजा, जशपुर, धमतरी, बालोद, बेमेतरा, कांकेर, बस्तर: 3.96 करोड़ रुपये प्रति जिला

दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर: 1.32 करोड़ रुपये प्रति जिला

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: 1.58 करोड़ रुपये

दुर्ग, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा: 7.92 करोड़ रुपये प्रति जिला

रायपुर: 9.24 करोड़ रुपये


इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, खेल मैदान, सामुदायिक भवन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी परियोजनाओं में किया जाना था।

पारदर्शिता की कमी: घोटाले का शक

विधायक निधि से संबंधित निर्माण कार्यों की जानकारी न दिए जाने से पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस स्थिति से यह संदेह पैदा होता है कि निधि का दुरुपयोग किया गया है।
आशीष सिन्हा ने कहा कि सार्वजनिक धन को कैसे और कहां खर्च किया गया, यह जनता को जानने का अधिकार है। जानकारी न देने का सीधा मतलब है कि घोटाले को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

सरकार और प्रशासन पर सवाल

विधायक निधि का उपयोग जनता की भलाई के लिए होना चाहिए, लेकिन इस मामले ने प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर घोटाले के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकार के कार्यान्वयन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दावों को कमजोर करेगा।

जांच और सुधार की मांग

आरटीआई कार्यकर्ता ने इस मामले में गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर विधायक निधि से जुड़े कार्यों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए तो कई और घोटाले सामने आ सकते हैं।
जनता और आरटीआई कार्यकर्ता पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि विधायक निधि का उपयोग सही तरीके से हो और इसका लाभ जनता तक पहुंचे।


विधायक निधि से जुड़े इस मामले ने शासन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर सही तरीके से जांच होती है, तो इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकती है और सार्वजनिक धन के सही उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकता है। वहीं, जनता को जागरूक रहकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेही मांगने की जरूरत है।

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