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रामानुजगंज में ढाबा जांच के दौरान विवाद, युवक पर SC/ST सहित कई धाराओं में मामला दर्ज,एकतरफा कार्रवाई का आरोप

रामानुजगंज में ढाबा जांच के दौरान विवाद, युवक पर गंभीर धाराएं; कार्रवाई पर उठे सवाल


रामानुजगंज, 19 मार्च।
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में एलपीजी गैस के उपयोग को लेकर की जा रही जांच के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने एक युवक के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं आरोपी पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार, 18 मार्च को एसडीएम के निर्देश पर सहायक खाद्य अधिकारी चंपाकली दिवाकर संयुक्त टीम के साथ होटल और ढाबों में एलपीजी गैस के वितरण एवं विनिमय आदेश 2000 के प्रावधानों के उल्लंघन की जांच कर रही थीं। इसी दौरान शाम को रामानुजगंज रिंग रोड स्थित सूरज ढाबा में चेकिंग की जा रही थी।


बताया गया कि इस दौरान रामानुजगंज निवासी राहुल जीत सिंह (30 वर्ष) जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। सहायक खाद्य अधिकारी द्वारा मना करने पर विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि राहुल जीत सिंह और उसके साथी ने अधिकारी का रास्ता रोककर जातिगत गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी, जिससे शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।
इस संबंध में प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर थाना रामानुजगंज में अपराध क्रमांक 45/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी राहुल जीत सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।


कोई भी राज्य सेवक या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान हुए विवाद में मैं दूसरे पर या प्रतिकार करने वाले व्यक्ति पर गंभीर मामले एट्रोसिटी एक्ट पंजीकृत करवा सकते हैं क्या इस मामले में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के क्या निर्देश है


ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर हमला या बाधा उत्पन्न होने पर FIR दर्ज की जा सकती है, लेकिन अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (Atrocities Act) का इस्तेमाल केवल तब होगा जब विवाद का कारण जातिसूचक गाली या जातिगत भेदभाव हो। सामान्य विवाद पर यह एक्ट नहीं लगता; इसके दुरुपयोग पर न्यायालय सख्त है और IPC 182/211 के तहत कार्यवाही हो सकती है।

महत्वपूर्ण कानूनी निर्देश:
ड्यूटी के दौरान हमला: यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी पर है और उससे काम करने से रोका जाता है, तो सरकारी काम में बाधा (IPC 186, 332, 353) का केस दर्ज किया जा सकता है, जो एक गंभीर अपराध है।
एट्रोसिटी एक्ट की शर्तें: SC/ST एक्ट तभी लागू होगा जब पीड़िता/पीड़ित एससी/एसटी वर्ग से हो और हमला/गाली-गलौज इसी पहचान के कारण की गई हो।
न्यायालय का रुख (SC/HC): यदि शिकायत झूठी पाई जाती है या बदले की भावना (प्रतिकार) से की गई है, तो हाईकोर्ट FIR को रद्द कर सकता है (CrPC 482)।
झूठे मामले पर कार्यवाही: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, यदि जांच में एट्रोसिटी एक्ट का मामला झूठा साबित होता है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्यवाही हो सकती है।
सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध कार्यवाही: यदि कर्मचारी खुद दोषी पाया जाता है, तो उस पर भी आपराधिक मामला चल सकता है, लेकिन उसके लिए विभागीय या सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी (CrPC 197) जरूरी हो सकती है।
निष्कर्ष: यदि विवाद केवल कार्यस्थल पर बहस है, तो यह सामान्य मामला है। एट्रोसिटी एक्ट केवल तभी लगेगा जब घटना के पीछे जातिगत मंशा हो।
दिया हुआ आवेदन


वहीं राहुल सिंह का कहना है कि उन्होंने भी थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने केवल शासकीय अधिकारी के पक्ष में कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस वीडियो की चर्चा हो रही है, उसमें उनके द्वारा सहायक खाद्य अधिकारी के खिलाफ कोई जातिगत या आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है।


इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का माहौल बना हुआ है और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।

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