तातापानी महोत्सव 2026 में अव्यवस्था और उपेक्षा का आरोप, रामानुजगंज के पार्षदों ने किया सामूहिक बहिष्कार

तातापानी महोत्सव 2026 में अव्यवस्थाओं का आरोप, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से बढ़ा विवाद, पार्षदों ने किया सामूहिक बहिष्कार
बलरामपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल तातापानी में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14, 15 एवं 16 जनवरी 2026 को आयोजित तातापानी महोत्सव इस बार अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। नगर पालिका परिषद रामानुजगंज के समस्त पार्षदगण, जो भारतीय जनता पार्टी से निर्वाचित हैं, ने महोत्सव आयोजन में स्वयं को उपेक्षित और अपमानित महसूस करते हुए कार्यक्रम का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया है।

आमंत्रण और पास व्यवस्था पर सवाल
पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका परिषद रामानुजगंज के किसी भी निर्वाचित पार्षद को न तो सम्मानजनक आमंत्रण दिया गया और न ही विधिवत प्रवेश पास उपलब्ध कराए गए। पार्षदों के निवास पर जो आमंत्रण पत्र भेजे गए, उनमें केवल एक VIP पास और एक अन्य VVIP पास संलग्न था। इससे न केवल भ्रम की स्थिति बनी, बल्कि यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि दो अलग-अलग श्रेणी के पास भेजने का औचित्य क्या है और उनका उपयोग किसके लिए किया जाना था।
पार्षदों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों के सम्मान और मर्यादा के अनुरूप पास और आमंत्रण की व्यवस्था नहीं होना आयोजन की गंभीर खामी को दर्शाता है।
नगर पालिका रामानुजगंज नेता प्रतिपक्ष प्रतीक सिंह ने भाजपा पार्षदों के द्वारा तातापानी महोत्सव का बहिष्कार करने पर चुटकी लेते हुए देखिए अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर क्या लिखा है


मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान भी उपेक्षा का आरोप
दिनांक 14 जनवरी 2026 को तातापानी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आगमन के दौरान भी रामानुजगंज के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को उचित स्थान नहीं दिया गया। न तो उन्हें मंच के समीप बैठने की व्यवस्था मिली और न ही स्वागत, माल्यार्पण अथवा अन्य प्रोटोकॉल संबंधी दायित्वों में शामिल किया गया।
पार्षदों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज करना न केवल उनकी गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं के भी विपरीत है।
बहिष्कार का निर्णय, जिला मेला समिति को पत्र
इन सभी परिस्थितियों से आहत होकर नगर पालिका परिषद रामानुजगंज के समस्त पार्षदों ने तातापानी महोत्सव 2026 के कार्यक्रम का सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का निर्णय लिया। इस संबंध में एक लिखित पत्र नगर पालिका अध्यक्ष के माध्यम से जिला मेला समिति को भेजा गया है, जिसमें पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए नाराजगी दर्ज कराई गई है।
पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यह बहिष्कार किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और उपेक्षा के विरोध में किया गया है।
प्रशासनिक नाकामी का आरोप
पार्षदों का आरोप है कि इस प्रकार की खामियां जिला प्रशासन की नाकामी को उजागर करती हैं। जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही उचित सम्मान और स्थान नहीं मिल रहा है, तो आम जनता और श्रद्धालुओं के साथ व्यवस्थाओं का स्तर क्या होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
श्रद्धालुओं में भी नाराजगी
महोत्सव में पहुंचे श्रद्धालु और पर्यटक भी इस बार व्यवस्थाओं से खासे नाखुश नजर आए। मेला परिसर में अव्यवस्थित प्रवेश, भीड़ नियंत्रण की कमी, पार्किंग, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई श्रद्धालुओं ने अव्यवस्था के चलते असंतोष जताया और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए।
प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या मेला समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और भविष्य में तातापानी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए क्या सुधार किए जाते


