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सहकारी बैंक घोटाले पर ईडी का शिकंजा, 30 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी की जांच शुरू,500 किसानों की शिकायत बनी आधार

बलरामपुर सहकारी बैंक घोटाला: 30.51 करोड़ की अनियमितता की जांच में ईडी की एंट्री, 500 किसानों की शिकायत पर कार्रवाई तेज


बलरामपुर। सरगुजा संभाग के बहुचर्चित सहकारी बैंक घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हो गई है। किसानों के नाम पर कथित तौर पर किए गए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की जांच को नया मोड़ देते हुए ईडी ने लगभग 30 करोड़ 51 लाख रुपये के मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच के दायरे में शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज सहकारी बैंक शाखाएं शामिल हैं।


जानकारी के अनुसार, जिले के करीब 500 किसानों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनके नाम पर बिना जानकारी या अनियमित तरीके से केसीसी ऋण स्वीकृत किए गए। शिकायतों के बाद सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन स्तर पर जांच शुरू हुई थी, जिसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई।


यह मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि किसानों के खातों और ऋण प्रकरणों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। कई किसानों ने दावा किया था कि उन्हें ऋण की जानकारी तक नहीं थी, जबकि रिकॉर्ड में उनके नाम पर राशि दर्ज थी। मामले के उजागर होने के बाद बैंकिंग और सहकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए थे।
अब ईडी के जांच में शामिल होने से मामले की जांच और व्यापक होने की संभावना है। एजेंसी वित्तीय लेनदेन, ऋण वितरण प्रक्रिया और कथित गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।


इस बीच, प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने ईडी जांच का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


वहीं, प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रभावित सहकारी शाखाओं में खाद और बीज वितरण की व्यवस्था भी दोबारा शुरू कर दी गई है, जिससे सैकड़ों किसानों को राहत मिली है। लंबे समय से परेशान किसान अब ईडी जांच से न्याय मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।


स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित किसानों को भी राहत मिल सकेगी। फिलहाल पूरे मामले पर किसानों, प्रशासन और राजनीतिक गलियारों की नजर बनी हुई है।

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