निजी जमीन पर बना सरकारी आंगनबाड़ी भवन,किराये के कच्चे मकान में पढ़ने को मजबूर बच्चे

पंडरी में निजी जमीन पर बना आंगनबाड़ी भवन कब्जे में, कच्चे किराये के मकान में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
वाड्रफनगर। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत अंतर्गत पंडरी गांव में सरकारी लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां वर्ष 2019-20 में लाखों रुपये की लागत से निर्मित नया आंगनबाड़ी भवन आज भी बच्चों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है। भवन पर जमीन मालिक ने कब्जा कर रखा है, जिसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किराये के एक कच्चे मकान में किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बछरू डूबा आंगनबाड़ी केंद्र के लिए नए भवन की स्वीकृति दी गई थी और निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी गई थी। आरोप है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों ने शासकीय भूमि के बजाय एक ग्रामीण की निजी जमीन पर भवन का निर्माण करा दिया। जमीन मालिक का दावा है कि भूमि देने के बदले उसके परिवार के एक सदस्य को आंगनबाड़ी केंद्र में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वादा पूरा नहीं होने पर उसने भवन पर कब्जा कर लिया।

ग्रामीण पिछले दो से तीन वर्षों से भवन में काबिज है। इसके कारण बच्चों को किराये के कच्चे मकान में पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात के मौसम में केंद्र संचालन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। विडंबना यह है कि सरकारी भवन मौजूद होने के बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग को केंद्र संचालन के लिए किराया भी देना पड़ रहा है।
वहीं कब्जाधारी ग्रामीण का कहना है कि यदि शासन उसकी जमीन के बदले दूसरी जमीन उपलब्ध करा दे तो वह भवन से कब्जा हटाने को तैयार है।

मामले को लेकर एसडीएम ने जांच की बात कही है। हालांकि यह मामला लंबे समय से चर्चा में है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी धन से निर्मित भवन का उपयोग कब शुरू होगा और इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।