रामानुजगंज में दुकान संचालक पर युवती से कथित छेड़छाड़ का आरोप, एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज

रामानुजगंज में दुकान संचालक पर युवती से कथित छेड़छाड़ का आरोप, एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज
रामानुजगंज, 15 जुलाई। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज थाना क्षेत्र में एक निजी दुकान में कार्यरत युवती ने दुकान संचालक पर कथित रूप से छेड़छाड़ और गलत नीयत से शारीरिक स्पर्श का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायत के आधार पर रामानुजगंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के अनुसार, शिकायतकर्ता युवती ने बताया कि वह मूल रूप से बलरामपुर जिले की निवासी हैं।

पिछले लगभग छह वर्षों से रामानुजगंज में रहकर पढ़ाई कर रही हैं और बीते एक महीने से रानी श्रृंगार स्टोर में कार्यरत हैं।शिकायत में कहा गया है कि दुकान संचालक तौकीर रजा पिछले कुछ समय से उनके साथ असामान्य व्यवहार कर रहा था, जिससे वह असहज महसूस करती थीं। आरोप है कि 14 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे दुकान में कोई ग्राहक मौजूद नहीं था। इसी दौरान तौकीर रजा ने कथित रूप से उनके दोनों हाथ पकड़कर जोर से मरोड़ दिए और गलत नीयत से उनके सीने एवं शरीर को छूने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना से वह घबरा गईं और किसी तरह स्वयं को छुड़ाकर दुकान से बाहर निकल गईं।एफआईआर में शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि आरोपी उनकी अनुसूचित जनजाति (खैरवार) से संबंधित होने की जानकारी रखता था। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी जोड़ी हैं।शिकायत मिलने के बाद रामानुजगंज थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 74 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(w)(i) और 3(2)(va) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। मामला दर्ज होने के बाद विवेचना शुरू कर दी गई है और जांच अधिकारी को साक्ष्य संकलित करने तथा संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्ष एवं विधिसम्मत जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि एफआईआर किसी भी मामले में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का प्रारंभिक दस्तावेज होती है। इसमें दर्ज आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होती है। आरोपी का दोषी या निर्दोष होना न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विकाश महतो जिला संयोजक और कार्यकर्ताओं ने घटना को गंभीर और संगीन अपराध बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी हिंदू बहन के साथ होने वाले अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ एबीवीपी हमेशा मजबूती से खड़ी रही है और आगे भी ऐसे मामलों में डटकर विरोध करेगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भारी संख्या में थाना परिसर में कार्यकर्ता उपस्थित थे

