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FLN मेला 2025, बच्चों ने खेल-खेल में सीखी बुनियादी कौशल

प्रा. शाला सेंदूरपारा में FLN मेला 2025 का आयोजन, बच्चों ने खेल के माध्यम से सीखी नई अवधारणाएं

रामानुजगंज, 14 नवम्बर 2025। बाल दिवस के अवसर पर प्राथमिक शाला सेंदूरपारा महावीरगंज, संकुल कनकपुर में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में शाला प्रबंधन समिति, पालक, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने नेहरू जी के व्यक्तित्व और उनके योगदान को याद किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप FLN यानी Foundational Literacy and Numeracy के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष FLN मेला 2025 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को सत्र 2026-27 तक बुनियादी भाषा और संख्या ज्ञान से सशक्त करना है। यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, स्कूल शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ और डाइट अंबिकापुर के मार्गदर्शन में तथा जिला और विकासखंड के शिक्षा अधिकारियों की देखरेख में आयोजित किया गया।



विकासखंड रामचंद्रपुर के हर प्राथमिक विद्यालय और बालवाड़ी केंद्रों की तरह प्रा. शाला सेंदूरपारा में भी मेले ने बच्चों को सीखने का नया अनुभव दिया। मेले में भाषा, गणित, अंग्रेजी और बालवाड़ी स्तर से जुड़ी अवधारणाओं पर आधारित SCERT रायपुर द्वारा स्वचालित मोड में संचालित अलग-अलग स्टॉल लगाए गए। बच्चे खेल और गतिविधियों के जरिए खुद से सीखते रहे। हर स्टॉल पर हर बार नई गतिविधि मिलने से बच्चों की रुचि लगातार बनी रही। बच्चों ने अपनी पसंद के अनुसार खेल चुने और अपनी गति के अनुसार उनसे सीखते गए।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ अभी मूल्यांकन सूची में लगभग अंतिम स्थान पर है और देश के कई प्राथमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान से वंचित हैं। ऐसे में FLN मेला एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है, जहां बच्चे सीखने के साथ अपने साथियों को भी सिखाने का हुनर विकसित करते हैं।

डाइट FLN प्रभारी रचना सिंह और DRGs मानसरोवर सिंह ने समुदाय से अपील की कि वे शिक्षकों के साथ मिलकर इन गतिविधियों को लगातार जारी रखें। उनके अनुसार सीखने की खुशी ही शिक्षा की असली सफलता है और यही मेला बच्चों को समझ के साथ सीखने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

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