रामानुजगंज तहसील में खुला लूट का खेल! हक त्याग के नाम पर हजारों की अवैध वसूली

रामानुजगंज तहसील में खुला लूट का खेल! हक त्याग के नाम पर हजारों की अवैध वसूली
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां दस्तावेज लेखकों की मिलीभगत से खुलेआम लूट का खेल चल रहा है, जहां गरीब और आम नागरिकों से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक पैसा वसूला जा रहा है।
ताजा मामला ग्राम कानपुर निवासी तस्वुन पति मुस्लिम का है, जो अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी जमीन अपने भाइयों—सिराजुद्दीन अंसारी, तैयब अंसारी और तालिब अंसारी (निवासी महावीर गंज)—के नाम हक त्याग करने पहुंचीं।
सरकारी नियमों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में कुल खर्च करीब ₹3960 होना चाहिए था। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली।
आरोप है कि दस्तावेज लेखक ने इस काम के लिए मोटी रकम ऐंठ ली। तीनों भाइयों से अलग-अलग ₹10,000, ₹11,000 और ₹12,000 तक वसूले गए। यानी एक साधारण हक त्याग प्रक्रिया में हजारों रुपये की खुली लूट की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि:क्या तहसील प्रशासन को इस खेल की भनक नहीं है?
या फिर सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है?
आखिर कब तक आम जनता को ऐसे ही लूटा जाता रहेगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। तहसील में रजिस्ट्री, नामांतरण और हक त्याग जैसे कामों में लंबे समय से इसी तरह की अवैध वसूली की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद प्रशासन जागता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि इस लूट पर लगाम लग सके।
रामानुजगंज तहसीलदार मनोज पैकरा पूरे मामले कहां है कि अगर किसी भी दस्तेज लेखक से पैसे अधिक मांग की जाती है तो तत्काल वह हमसे संपर्क करें




