बलरामपुर में कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ यात्रा’, जरिता लैतफलांग का आरोप: “भाजपा छीन रही आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकार”

बलरामपुर में कांग्रेस की ‘संविधान बचाओ यात्रा’ का जोरदार आयोजन
जरिता लैतफलांग और कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना, कहा – संविधान बचाने की लड़ाई में सबको जुड़ना होगा
बलरामपुर, छत्तीसगढ़ |
बलरामपुर जिले में कांग्रेस पार्टी द्वारा संविधान बचाओ यात्रा का आयोजन बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। इस यात्रा का उद्देश्य आम नागरिकों, विशेषकर आदिवासी और वंचित समुदायों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और भारतीय संविधान की मूल आत्मा को बचाए रखने के लिए जनजागरण फैलाना था।

इस यात्रा की मुख्य अतिथि थीं जरिता लैतफलांग, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव एवं छत्तीसगढ़ की सह-प्रभारी हैं। यात्रा का समापन बलरामपुर के राजू भवन में एक जनसभा के रूप में हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

जरिता लैतफलांग का तीखा प्रहार: “संविधान से छेड़छाड़ कर रही है भाजपा”
सभा को संबोधित करते हुए जरिता लैतफलांग ने कहा:
“बलरामपुर जिला संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां आदिवासी समुदायों को जल, जंगल और जमीन पर विशेष अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इन अधिकारों को ठेकेदारों और पूंजीपतियों को सौंपकर संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह सीधे तौर पर आदिवासी समुदाय के हक़ को छीनने का प्रयास है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ़ दिखावे के लिए आदिवासी अधिकारों की बात करती है, लेकिन वास्तविकता में उनके मौलिक अधिकारों को systematically कमजोर किया जा रहा है।

महिला तस्करी के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा
जरिता लैतफलांग ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के गृह जिले में महिला तस्करी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा:
“भाजपा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश में सबसे ज़्यादा महिला तस्करी के मामले मुख्यमंत्री के जिले में ही दर्ज हो रहे हैं। यह सिर्फ आँकड़े नहीं हैं, बल्कि हजारों मासूम बच्चियाँ और महिलाएं हैं जिनकी ज़िंदगी बर्बाद हो रही है। लेकिन सरकार के लिए यह सिर्फ एक ‘मामला’ बनकर रह गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इन गंभीर मामलों पर भाजपा सरकार आंखें मूंदे हुए है और संवेदनहीनता का परिचय दे रही है।

“संविधान नहीं रहेगा तो हम भी नहीं रहेंगे”
इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने मंच से भारतीय संविधान की प्रति हाथ में उठाकर भावुक अपील की। उन्होंने कहा:
“संविधान ही हमारा सबसे बड़ा अधिकार है। यही हमें समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और न्याय देता है। अगर संविधान पर हमला होता है, तो हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि हर नागरिक संविधान की रक्षा के लिए जागरूक और संगठित हो।”
जरिता लैतफलांग ने यह भी कहा कि यह यात्रा कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का अभियान है।

स्थानीय जनता का समर्थन और उत्साह
यात्रा के दौरान रास्ते भर जगह-जगह लोगों ने कांग्रेस नेताओं का स्वागत किया। कई सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और युवा कार्यकर्ताओं ने संविधान के समर्थन में रैलियों और नारेबाजी के ज़रिए हिस्सा लिया। “संविधान बचाओ – देश बचाओ”, “जल, जंगल, जमीन हमारा अधिकार”, मोदी हटाओ, देश का झण्डा तिरंगा नहीं चलेगा दो रंगा,जैसे नारों से सड़कों पर जनजागृति का माहौल दिखाई दिया।
*राजनीतिक विश्लेषण*
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने इस यात्रा के ज़रिए आदिवासी और हाशिए पर खड़े वर्गों को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश की है। इससे आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
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