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बलरामपुर वनमंडल में एंटी स्नेयर वॉक: वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सशक्त पहल

बलरामपुर वनमंडल में एंटी स्नेयर वॉक : वन्यजीवों के संरक्षण हेतु जागरूकता और सुरक्षा का सशक्त अभियान

बलरामपुर, छत्तीसगढ़।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय पहल के अंतर्गत बलरामपुर वनमंडल में “एंटी स्नेयर वॉक” अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान वनमंडलाधिकारी श्री आलोक कुमार बाजपेयी के निर्देशन में समस्त परिक्षेत्रों — बलरामपुर, रामानुजगंज, धमनी, वाड्रफनगर, रघुनाथनगर, चांदो, कुसमी, शंकरगढ़ एवं राजपुर — में एक साथ संचालित किया जा रहा है।

अभियान की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य

वन्यजीवों की घटती संख्या का एक बड़ा कारण अवैध शिकार और फंदों का उपयोग है। विशेष रूप से विद्युत प्रवाहित तारों एवं पारंपरिक फंदों के माध्यम से जंगली जानवरों को शिकार बनाया जाता है, जिससे न केवल दुर्लभ प्रजातियाँ खतरे में पड़ती हैं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के पालतु मवेशी और कभी-कभी ग्रामीण जन भी इसके शिकार हो जाते हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए बलरामपुर वनमंडल द्वारा यह अभिनव अभियान आरंभ किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्रों में शिकार के लिए लगाए गए अवैध उपकरणों की खोज, जब्ती एवं नष्टिकरण करना है।

एंटी स्नेयर वॉक का स्वरूप

इस अभियान के तहत वन क्षेत्र में पैदल गश्त (वॉक) की जाती है। यह गश्त विशेष रूप से उन स्थानों पर केंद्रित होती है जहाँ शिकार की घटनाओं की आशंका या पहले रिकॉर्ड हो चुकी गतिविधियाँ पाई गई हैं।

टीम संरचना:
हर वन परिक्षेत्र में एक संयुक्त टीम गठित की गई है, जिसमें शामिल हैं:

  • वन परिक्षेत्राधिकारी
  • परिक्षेत्र सहायक
  • परिसर रक्षक
  • सुरक्षा श्रमिक
  • वन प्रबंधन समिति (JFMC) के सक्रिय सदस्य
  • स्थानीय जागरूक ग्रामीण

इन टीमों को प्राथमिक रूप से संदिग्ध स्थानों पर गश्त कर शिकारी फंदे, विद्युत प्रवाहित तार, तथा अन्य अवैध सामग्री का पता लगाकर उन्हें जब्त करना और नष्ट करना है।

कानूनी प्रक्रिया और सख्त कार्यवाही

बलरामपुर के वनमंडलाधिकारी श्री बाजपेयी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकार से संबंधित किसी भी उपकरण की बरामदगी की स्थिति में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत तत्काल कार्रवाई की जाए। आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जाए।

विद्युत प्रवाहित तारों का उपयोग न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह एक घातक आपराधिक कृत्य भी है, जो जंगल की जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुँचाता है।

जनसहभागिता और जागरूकता का महत्व

वन विभाग द्वारा जनसामान्य से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति को वन क्षेत्र में शिकारी गतिविधि, तार या फंदा लगाए जाने की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत नजदीकी:

  • वन कर्मचारी
  • वन परिक्षेत्राधिकारी
  • या बलरामपुर वनमंडल कार्यालय

को सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वन विभाग द्वारा सम्मानित भी किया जा सकता है।

संभावित लाभ

  1. वन्यजीवों की रक्षा: दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों के शिकार को रोकने में सहायता।
  2. मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी: पालतू मवेशियों और ग्रामीणों की सुरक्षा में वृद्धि।
  3. स्थानीय जागरूकता: ग्रामीण समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति चेतना का विकास।
  4. शिकारियों पर अंकुश: अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही।

निष्कर्ष

बलरामपुर वनमंडल की यह पहल एक मॉडल अभियान के रूप में उभर रही है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, बल्कि वन विभाग और जनसामान्य के सहयोग से कैसे एक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है, इसका उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
ऐसी मुहिमें अन्य जिलों एवं राज्यों में भी प्रारंभ की जाएँ तो जैव विविधता की सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकती हैं।

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