टोकन के नाम पर किसान से खेल!प्रशासन और सरकार की लापरवाही से फंसा किसान का धान,हाई कोर्ट से मिला न्याय

टोकन के नाम पर किसान से खेल! हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही खरीदा 524 बोरा धान
बलरामपुर।
जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक किसान का 524 बोरा धान खरीदी से बाहर हो गया। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की, तब किसान को न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और किसान का धान खरीदा गया।
हाई कोर्ट से न्याय मिलने के बाद किसान राजदेव मिंज ने अपनी जीत का जश्न अनोखे तरीके से मनाया। रविवार को वह ग्रामीणों के साथ बैंड-बाजे के साथ नाचते-गाते ट्रैक्टर में धान लादकर बरदर धान खरीदी केंद्र पहुंचे और समर्थन मूल्य पर अपने धान की तौल कराई। यह दृश्य पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।

मामला जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर चित विश्रामपुर पंचायत का है। यहां के किसान राजदेव मिंज का आरोप है कि उनका करीब 524 बोरा धान ऑनलाइन टोकन नहीं कट पाने के कारण समय पर सरकारी खरीदी केंद्र में नहीं बिक पाया। किसान का कहना है कि वह कई बार अपने भाइयों के साथ खरीदी केंद्र टोकन कटवाने पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों ने उनका टोकन नहीं काटा। यहां तक कि आवेदन तक लेने से मना कर दिया गया और यह कहकर लौटा दिया गया कि खरीदी की लिमिट खत्म हो चुकी है।

किसान का कहना है कि जब उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की तो वहां से भी केवल आश्वासन ही मिला। लगातार चक्कर लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। आखिरकार मजबूर होकर किसान ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद माननीय हाई कोर्ट ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को धान खरीदी कराने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद ही प्रशासन ने किसान का धान खरीदा। न्याय मिलने की खुशी में किसान राजदेव मिंज गांव के लोगों के साथ बैंड-बाजे के साथ खरीदी केंद्र पहुंचे। वहां ग्रामीणों ने बैंड की धुन पर नाचते-गाते हुए अपनी खुशी जाहिर की और किसान ने अपना धान समर्थन मूल्य पर तौल कराया।
मौके पर पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है। उनका आरोप है कि सरकार बिचौलियों को संरक्षण दे रही है, जबकि असली किसान अपने हक के लिए अदालतों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।

इस घटना ने जिले में धान खरीदी व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसान कोर्ट नहीं जाता तो शायद उसका धान आज भी खरीदी से बाहर ही रहता।




