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जनसमस्या निवारण शिविर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों को किया जागरूक, कहा- जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती ही भविष्य की जरूरत

बलरामपुर, 30 मई। सुशासन तिहार के अंतर्गत विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत विजयनगर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर जनहित, पर्यावरण संरक्षण और कृषि जागरूकता का बड़ा मंच बनकर उभरा। शिविर में प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन किया और किसानों को प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, वनमंडलाधिकारी आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा ग्रामीणों से प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति से जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया।

जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण ही सुशासन की पहचान

शिविर को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल लोगों की शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि उनका त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से जनता के प्रति संवेदनशील एवं जवाबदेह होकर कार्य करने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की अपील

कृषि मंत्री ने किसानों को एग्रीस्टेक प्लेटफॉर्म में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि से जुड़ी अधिकांश योजनाओं का लाभ डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसान समय पर पंजीयन नहीं कराते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, धान खरीदी, खाद-बीज वितरण और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।

उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपने दस्तावेजों को अद्यतन रखें और शासन द्वारा विकसित तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग करें ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से प्राप्त हो सके।

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी आय और बचेगी मिट्टी की सेहत

मंत्री रामविचार नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों से जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के लगातार उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और उत्पादन लागत भी बढ़ती है।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, उत्पादन सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होता है तथा किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। मंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता ऐसी खेती पद्धतियों को अपनाने की है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी हों।

जल संरक्षण को बताया समय की सबसे बड़ी जरूरत

कृषि मंत्री ने जल संकट की चुनौती का उल्लेख करते हुए किसानों और ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए जागरूक किया। उन्होंने टपक सिंचाई पद्धति अपनाने, वर्षा जल संचयन करने और भू-जल संवर्धन के उपायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं बल्कि आवश्यकता के अनुरूप उपयोग होना चाहिए। यदि आज जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

मंत्री ने उपस्थित लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का भी आग्रह किया।

शिविर में हुए अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पांच बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया तथा पांच गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म संपन्न की गई। इसके अलावा विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को सामग्री और लाभों का वितरण भी किया गया।

जल संरक्षण

जल संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देने वाले मॉडल बने आकर्षण का केंद्र

विजयनगर में आयोजित शिविर केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं रहा बल्कि जनजागरूकता अभियान का भी प्रभावी माध्यम बना। यहां जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, जैविक खेती और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कई जीवंत मॉडल प्रदर्शित किए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

शिविर में पांच प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर और सोख्ता गड्ढे का प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि अतिरिक्त और वर्षा के पानी को संरक्षित करने के लिए यह बेहद सरल और उपयोगी तकनीक है। मॉडल को देखकर कई ग्रामीणों ने अपने घरों और हैंडपंपों के पास ऐसे संरचनाएं बनाने की इच्छा जताई।

नील-हरित शैवाल से जैविक खेती की जानकारी

कृषि विभाग द्वारा नील-हरित शैवाल तैयार करने की प्रक्रिया और इसके उपयोग का प्रदर्शन भी किया गया। एक छोटे तालाबनुमा ढांचे के माध्यम से किसानों को बताया गया कि यह धान की खेती के लिए प्राकृतिक नाइट्रोजन युक्त जैव उर्वरक का कार्य करता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, फसल उत्पादन में सुधार होता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। कम लागत में बेहतर उत्पादन की यह तकनीक किसानों को काफी पसंद आई।

कचरा प्रबंधन के प्रति भी किया गया जागरूक

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत शिविर में कचरा पृथक्करण और प्रबंधन का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की जानकारी दी गई तथा बताया गया कि गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा सकती है।

अलग-अलग रंगों के डस्टबिन के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझाया गया कि घर स्तर पर ही कचरे का पृथक्करण कर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

मौके पर हुआ कई समस्याओं का समाधान

शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और शिकायतें अधिकारियों के समक्ष रखीं। संबंधित विभागों द्वारा कई आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष मामलों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांव स्तर पर इस तरह के शिविरों से लोगों को अपनी समस्याएं रखने और योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिल रहा है।

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